बिजली सबस्टेशन की जमीन पर कब्जा करने को लेकर बृहस्पतिवार को बिजली विभाग के अधिकारियों का पूर्व विधायक देवेंद्र पाल सिंह के समर्थकों से विवाद हो गया। इस पर एसडीएम सदर जयनाथ सिंह यादव ने पुलिस और राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजकर मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए।
विवादित जमीन दशरथ सिंह और शिवपाल सिंह के पूर्वजों ने वर्ष 1972 में सब स्टेशन बनने के समय दान में दी थी, तब से वहां पर सब स्टेशन स्थित है, लेकिन कागजों में यह जमीन बिजली विभाग के नाम नहीं हो सकी। इससे विवादित जमीन दशरथ सिंह और शिवपाल सिंह के नाम पर ट्रांसफर हो गई। इसकी जानकारी होने पर दशरथ और शिवपाल करीब एक वर्ष पहले देवेंद्रपाल सिंह को जमीन बेच दी। इसका दाखिल-खारिज का काम भी पूर्व विधायक ने करा लिया। इसे लेकर पूर्व विधायक और बिजली विभाग से मुकदमेबाजी पहले से ही चल रही है।
बृहस्पतिवार को सब स्टेशन के पास स्थित पुरानी बिल्डिंग को पूर्व विधायक अपने समर्थकों के साथ जेसीबी मशीन से तोड़ने लगे। इसकी खबर मिलने पर बिजली विभाग के एसडीओ मनीष चौबे और जेई हसीब आलम ने मौके पर पहुंचकर विधायक को ऐसा करने से रोका। इसके बावजूद भी जब विधायक के समर्थक नहीं माने तो बिजली विभाग के अधिकारियों ने एसडीएम सदर को इसकी सूचना दी। एसडीएम ने मदनापुर एसओ आरपी यादव को फोर्स के साथ मौके पर भेजने के निर्देश दिए। मौके पर पहुंची पुलिस ने विधायक के समर्थकों को रोककर तोड़फोड़ बंद करा दी।
पूर्व विधायक देवेंद्र पाल सिंह के मुताबिक सब स्टेशन से लगी हुई उनकी तीन बीघा जमीन है। उसी में सब स्टेशन का जर्जर भवन बना हुआ है। हमारे लोग उस भवन र्की इंटों को हटा रहे थे। कहा कि उनकी ही जमीन है तो कब्जे का प्रयास भला क्यों करेंगे।
एसडीएम सदर जयनाथ यादव ने बताया कि पूर्व विधायक के द्वारा कराई जा रही तोड़फोड़ को रुकवा दिया गया है। इस मामले में दोनों पक्षों से संबंधित जमीन के कागजात मंगवाए गए हैं। इसके साथ ही लेखपाल और कानूनगो जमीन की नापजोख करेंगे। इसके बाद ही कुछ भी स्पष्ट तौर पर पता हो सकेगा।