करीब चार साल पहले तिलहर थाना क्षेत्र के गांव विरसिंह पुर में विवाहिता की ससुराल में गला दबाकर की गई हत्या के मामले में सुनवाई पूरी करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट (महिला आपराधिक वाद) नंबर 13 ने आरोपी पति धर्मेंद्र सिंह को दोषीसिद्ध अभियुक्त करार दिया। अपर सत्र न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव ने फैसला सुनाते हुए धर्मेेंद्र को उम्र कैद की सजा दी और 20 हजार रुपये जुर्माना मुकर्रर किया। इस मामले में सह आरोपी धर्मेंद्र की मां प्रेमवती को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया जबकि दूसरे सह आरोपी धर्मेंद्र के पिता महेश पाल सिंह की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।
यह वाकया 17 अप्रैल 2012 का है। वादी ढाकन लाल ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि उन्होंने अपनी बेटी कुसुमा देवी की शादी दो साल पहले तिलहर निवासी धर्मेंद्र से की थी। शादी में उन्होंने 42 हजार रुपये दहेज के अलावा अन्य सामान और आभूषण भी दिए थे। लेकिन ससुरालियों ने शादी के बाद से लगातार मोटरसाइकिल की मांग पूरी करने दबाव बनाते हुए इनकी बेटी को प्रताड़ित करने लगे। मारपीट से उकताकर वह कई बार मायके आई तो समझाबुझाकर वापस ससुराल पहुंचाया गया। घटना से तीन रोज पहले ही कुसुमा को वह ससुराल पहुंचाकर गए थे लेकिन 17 अप्रैल की सुबह ससुराल के पड़ोसियों से बेटी के मार दिए जाने की सूचना पाकर पहुंचे तो बेटी की लाश घर के भीतर खाट पर पड़ी देखी। उसी दिन अपराह्न 2.40 बजे एफआईआर दर्ज हुई और सीओ तिलहर बीडी कठेरिया ने विवेचना शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुसुमा की मौत गला घोंटे जाने और दम घुटने से बताई गई। सात गवाहों और साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए मृतका के पति, सास और ससुर के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दायर की। सरकारी वकील उमेश गुर्जर के तर्क, प्रस्तुत साक्ष्य, आरोपियों और गवाहों के बयान सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट की अपर सत्र न्यायाधीश प्रतिमा श्रीवास्तव ने पाया कि मृतका क