शाहजहांपुर। विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम आलोक कुमार शुक्ल ने हत्या के मामले में तीन सगे भाइयों समेत सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक आरोपी की मुकदमे के दौरान मौत हो गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, खुदागंज क्षेत्र के गांव मवैया पट्टी निवासी रामेंद्र सिंह ने 24 अगस्त 2001 को रिपोर्ट लिखाई थी कि गांव के ही सुनील सिंह की श्रीकृष्ण से रंजिश चल रही थी। 24 अगस्त की शाम सात बजे श्रीकृष्ण बंदूक, सुरेंद्र सिंह राइफल और जितेंद्र इकनाली बंदूक लेकर आ गए और सुनील को पीटने लगे। सुनील को बचाने के लिए रामेंद्र के पिता रामपाल सिंह उर्फ कल्यान और पड़ोसी श्रीपाल पहुंच गए।
हमलावरों ने उन पर भी लाठी-कांता से प्रहार करना शुरू कर दिया। फायरिंग भी की। गोली लगने और कांते की चोट से रामपाल की मौके पर ही मौत हो गई। श्रीपाल को गंभीर चोटें आईं। सुनील और रामेंद्र किसी तरह जान बचाकर भाग गए। पुलिस ने सगे भाइयों श्रीकृष्ण, सुखपाल, ओमपाल और हरपाल के अलावा सुरेंद्र, जितेंद्र, देवेंद्रपाल सिंह, धनपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की।
अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकील अतुल अग्निहोत्री के तर्क सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने सुखपाल, ओमपाल, हरपाल, सुरेंद्र, जितेंद्र, देवेंद्रपाल सिंह, धनपाल को रामपाल की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। श्रीकृष्ण की मृत्यु मुकदमे के दौरान हो गई। दोषियों पर 28-28 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।