शाहजहांपुर। मिर्जापुर के ढाई गांव स्थित स्वामी रामाधार स्कूल के प्रधानाचार्य प्रभाकर मिश्रा की हत्या के दोषी को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हत्या के बाद शव को सेप्टिक टैंक में डाल दिया गया था। छह महीने बाद शव बरामद हुआ था। पुलिस ने प्रभाकर की पत्नी समेत तीन लोगों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत भेजा था।
प्रभाकर मिश्रा का परिवार कानपुर के थाना बर्रा क्षेत्र में संघर्ष नगर, कर्रही में रहता था। वह मिर्जापुर में पत्नी के साथ रहते थे। जनवरी 2018 में प्रभाकर की पत्नी शिल्पी की तहरीर पर मिर्जापुर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की थी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की लेकिन कुछ पता नहीं चला।
बाद में पड़ताल में सामने आया कि प्रभाकर को अपनी पत्नी शिल्पी और मकान मालिक विजय प्रताप सिंह उर्फ छोटू के बीच नजदीकियां होने का शक था। इसी के चलते विजय प्रताप ने 23 जनवरी की रात प्रभाकर को शराब में नशीली दवा मिलाकर पिलाईं। फिर गर्दन पर फावड़े से वार कर हत्या कर दी। शव को सेप्टिक टैंक में डाल दिया।
वहीं, गणतंत्र दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में जब प्रधानाचार्य प्रभाकर नहीं आए, तब फिर उनके बारे में चर्चा शुरू हुई। 28 जनवरी को छोटू के जरिये ही घरवालों को प्रधानाचार्य के लापता होने की सूचना पहुंची। पुलिस ने विवेचना के बाद रिपोर्ट दर्ज कर विजय प्रताप उर्फ छोटू, शिल्पी और विजय के दोस्त शिवम के खिलाफ आरोपपत्र अदालत भेजा।
अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश लवी यादव ने विजय प्रताप उर्फ छोटू को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। शिल्पी और शिवम पर आरोप साबित नहीं हो सके।