कृषि विभाग में डायरेक्ट बेनीफिट स्कीम के तहत किसानों को बीज वितरण में दिए जाने वाले अनुदान की करीब 50 लाख रुपये की धनराशि अनाधिकृत तौर पर जिले के बाहरी अन्य लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए जाने के मामले की जांच को कृषि निदेशालय लखनऊ से अपर निदेशक सोराज सिंह के नेतृत्व में अधिकारियों की पांच सदस्यीय टीम शुक्रवार को यहां पहुंची। जांच दल ने लोधीपुर स्थित कृषि उप निदेशक कार्यालय और विकास भवन के कृषि कार्यालय जाकर मामले की पड़ताल की। इस दौरान जांच टीम ने उप निदेशक कृषि डीएस राजपूत और जिला कृषि अधिकारी एसपी सिंह से प्रकरण को लेकर वार्ता की और बीज वितरण से संबंधित अभिलेख सत्यापन को अपने कब्जे में लिए।
बता दें कि किसानों को अनुदान पर दिए जाने वाले बीज के वितरण में लाखों का घोटाला यहां के निवर्तमान उप निदेशक डॉ. राधाकृष्ण यादव के कार्यकाल में हुआ, लेकिन इसका खुलासा तब हुआ, जब डॉ. यादव तबादले पर वाराणसी चले गए। यही नहीं, अपनी भूमिका पाक-साफ रखने के लिए डॉ. यादव ने ही वाराणसी से यहां आकर विभाग के दो लिपिकों के खिलाफ रोजा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
नव नियुक्त उप निदेशक डीएस राजपूत ने सारे प्रकरण से डीएम पुष्पा सिंह को अवगत कराया। डीएम ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निवर्तमान डीडीआर डॉ. यादव को भी घोटाले के लिए परोक्ष तौर पर दोषी मानते हुए दोबारा रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए। दूसरी एफआईआर में डॉ. यादव समेत मुख्यालय से अटैच किए गए निवर्तमान जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय, लिपिक नवनीत राठी व सचिन गुप्ता को गबन का आरोपी बनाया गया है।
इस प्रकरण में दोनों लिपिक पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं। साथ ही डीएम ने निवर्तमान डीडीआर डॉ. यादव और निवर्तमान जिला कृषि अधिकारी पांडेय के निलंबन की संस्तुति की है। इस बीच, मामले की गंभीरता को देखते कृषि निदेशक ने विभागीय जांच कराने का निर्णय किया। अपर निदेशक के नेतृत्व में गठित जांच टीम इसी उद्देश्य से यहां पहुंची। टीम में उप निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र मुख्यालय श्रवण कुमार, सहायक लेखाधिकारी सुशील श्रीवास्तव, लेखाकार विजय राय और मनोज द्विवेदी शामिल हैं।
इन अधिकारियों ने पहले लोधीपुर के उप निदेशक कार्यालय और बाद में जिला कृषि अधिकारी कार्यालय जाकर बीज वितरण सें संबंधित अभिलेख तलाशे। इस दौरान जांच टीम ने डीडीआर डीएस राजपूत और जिला कृषि अधिकारी एसपी सिंह से भी पूछताछ करके घोटाला की पड़ताल की। डीडीआर राजपूत ने बताया कि गबन की धनराशि में से 50.27 लाख रुपये की संबंधितों से रिकवरी कराई जा चुकी है।
इन बिंदुओं पर अधिकारिक टीम कर रही जांच
शासन स्तर से गठित जांच टीम ने कई अहम सवालों पर ध्यान केंद्रित किए हैं। मसलन, जिले में कृषि विभाग को किन एजेंसियों से कितना बीज प्राप्त हुआ, उसका विकास खंड वार कब-कब वितरण किया गया, किस क्षेत्र के कितने किसान लाभान्वित हुए, बीज लेने वाले किसानों के खातों में अनुदान की धनराशि प्रेषित की गई अथवा नहीं आदि। जांच अधिकारी इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि अनाधिकृत तरीके से लाभान्वित किए गए गैर जनपदों के लोगों का यहां से किस तरह का लिंक है।
डीडीआर दफ्तर में नहीं खुले अलमारियों के ताले
घोटाले की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से आरोपी निवर्तमान डीडीआर डॉ. यादव समेत दोनों निलंबित लिपिकों की अलमारियों में ताले पड़े होने से जांच में भी बाधा पड़ रही है। इसे देखते डीएम ने अलमारियां खुलवाने के लिए जिले के अफसरों की विशेष टीम गठित की है। हालांकि, इस टीम में शामिल एसडीएम सदर अजय तिवारी का कहना है कि अभी उन्हें डीएम से बंद अलमारियां खुलवाने के लिए कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
बीज वितरण में अनुदान को लेकर की गई गड़बड़ी की जांच अभी प्राथमिक अवस्था में है। प्रथम दृष्टया जांच के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया जा सकता। कृषि कार्यालयों से जुटाए जा रहे बीज वितरण संबंधी अभिलेखों का परीक्षण करने में कुछ समय लग सकता है। अगले कुछ दिनों में जांच के नतीजे सामने आ सकते हैं।
- श्रवण कुमार, उप निदेशक, बीज एवं प्रक्षेत्र मुख्यालय