छोटा चौक स्थित खत्री धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास रति दासी ने कहा कि ईश्वर सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना करना योग्य है। हमें सदैव असत्य को छोड़कर सत्य को ग्रहण करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करने का काम करती है। इस कथा का आनंद ब्रह्मनंद से अधिक है, जिस मानव में भजन का संस्कार होता है उसकी प्रतिकूलता अनुकूलता में बदल जाती है। हमें नित्य भगवान का सानिध्य लेना चाहिए, जबकि हम हमेशा उल्टा करते हैं। जब हमारे जीवन में प्रतिकूलता अर्थात कष्ट आते हैं तभी हम परमात्मा को पुकारते हैं। जब हम सही होते हैं तब परमात्मा का ध्यान नहीं रखते हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। कथा के अंत में आरती हुई। बाद में प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम में निर्भय चंद्र सेठ, मृदुल कपूर, संजय कपूर, अजय अग्रवाल, नंदू दीक्षित, रामनाथ अवस्थी, मधू कपूर, डा. रवि मोहन, डा. संगीता मोहन, डा. विकास टंडन, डा. रामनाथ टंडन, अजय शर्मा, ज्योति शर्मा, राजीव कपूर, हिना कपूर, साक्षी कपूर, राजा कपूर, शुभम कपूर, संजय सेठी,सुचित सेठ आदि मौजूद रहे। कथा आयोजक ऋषि कपूर ने बताया कि बृहस्पतिवार को कथा का समापन होगा। बाद में भंडारा होगा।