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लक्ष्मन के लागो बान, हनुमान ........

Tue, 08 Dec 2015 11:49 PM IST
पुवायां।
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मानस कथा मर्मज्ञ पियूष पति त्रिपाठी ने पुवायां के मोहल्ला तकिया में चल रहे शतचंडी महायज्ञ में प्रवचन के दौरान कहा कि श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी थे। जब कभी भी उनकी आवश्यकता हुई उन्होंने बल, बुद्धि और विवेक से श्री रामचंद्र जी के कार्य को पूरा किया।
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उन्होंने कहा कि मेघनाद से युद्ध में शक्ति लगने पर लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए। मेघनाद ने उन्हें उठाकर लंका ले जाना चाहा, लेकिन पूरा जोर लगाने के बाद भी वह लक्ष्मण को नहीं उठा सका। उन्हें मूर्छित देख हनुमान जी आए और जय श्रीराम का नारा लगाते हुए लक्ष्मण जी को उठाकर रामादल ले गए। विभीषण के सुषेण वैद्य के बारे में जानकारी देने पर हनुमान जी वैद्यराज को लंका से लेकर आए और फिर संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए। हनुमान जी श्रीराम को प्राणों से भी प्रिय थे, जो मन, क्रम, वचन से भगवान का दास हो जाता है वह भी हनुमान जी की तरह भगवान को प्रिय होता है और उसका यश पूरे संसार में फैल जाता है।
संजीवनी मिश्रा ने कहा कि जो भक्त सभी भरोसे त्यागकर भगवान की शरण में जाता है तो भगवान उसीके होकर रह जाते हैं और सदा भक्त का कल्याण करते हैं। कलियुग में केवल भगवान का नाम लेने से ही मानव का कल्याण हो जाता है, लेकिन इसके लिए निर्मल मन से भगवान का भजन करना चाहिए।
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