बैराजों से रिलीज पानी की मात्रा में रविवार को भी उतार-चढ़ाव के बीच रविवार को रामगंगा का जल स्तर 25 सेमी बढ़ने के बावजूद नदी के तटवर्ती गांवों में भूमि कटान नहीं थमने से वहां के ग्रामीण और किसान परेशान हैं। जिन लोगों के पक्के मकान नदियों में कट गए हैं, उन्हें डीएम नरेंद्र कुमार सिंह ने दो दिन पहले प्रति मकान 95100 रुपये की दर से आर्थिक सहायता की स्वीकृति के साथ एसडीएम के माध्यम से सहायता राशि दिलानी शुरू कर दी है, लेकिन कृषि भूमि के कटान से परेशान किसानों को सहायता मिलना तो दूर रहा, अभी राजस्व विभाग की टीमों ने उनके नुकसान का जायजा लेना शुरू नहीं किया है। रामगंगा के तटवर्ती मई खुर्द कलां गांव में एक दर्जन मकान कटने के बाद अधिकारियों ने गांव को कटान से बचाने में सारी ताकत झोंक दी है। हरिहरपुर, मौजमपुर, पहरुआ आदि गांवों की कृषि भूमि का कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग के अभियंता ठोकरें बनवाने में जुटे हैं। डीएम नरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मई खुर्द कलां में भूमि कटान पर कंट्रोल कर लिया गया है। इसके बावजूद बाढ़ चौकियों के स्टाफ को तटवर्ती गावों में पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इधर, सिंचाई विभाग के बाढ़ कंट्रोल रूम को मिली सूचनाआें के अनुसार रविवार को सुबह नरौरा बैराज से 46557 क्यूसेक पानी रिलीज हुआ जो कि बीते दिन की तुलना में पांच हजार क्यूसेक अधिक है। इसके बावजूद गंगा बदायूं के कछला घाट से लेकर जिले के भैंसार बांध ढाई घाट तक दस सेमी कम होकर 142.40 मीटर पर उतर आई है। कंट्रोल रूम प्रभारी के अनुसार रामगंगा में अन्य बैराजों से रिलीज पानी की मात्रा में बढ़ोत्तरी से रामगंगा 47 सेमी बढ़ गई है।