बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम राज्य पोषण मिशन के तहत जिला अस्पताल में कुपोषित बच्चों के लिए इलाज के लिए बनाया गया पोषण पुनर्वास केंद्र छोटा पड़ गया है, जबकि अभी वहां बीमार बच्चों की भर्ती का काम शुरू ही हो पाया है। दरअसल, केंद्र में केवल दस बेड की व्यवस्था की गई है जबकि इलाज पाने योग्य कुपोषित बच्चे कई गुना अधिक हैं।
पोषण मिशन के तहत डीएम, एसपी, सीडीओ समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने 116 गांव गोद लिए हैं। सभी गांवों में कराए गए आरंभिक सर्वे में तमाम बच्चे कुपोषित पाए गए। इनमें से 35-40 बच्चे अति कुपोषित यानी ऐसे मिले जिन्हें तुरंत इलाज की दरकार है। डीएम ने बीते दिन सिसौआ गांव के तीन ऐसे ही बच्चों को अस्पताल भेजने के निर्देश दिए थे। चूंकि, इलाज के लिए विभिन्न क्षेत्रोें से नौ बीमार बच्चे केंद्र पर लाए जा चुके हैं। इसलिए आने वाले दिनों में बेड की कमी दूर करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
यह है पोषण केंद्र की व्यवस्था
डॉ.अब्दुल हफीज खां को यहां का प्रभारी बनाया गया है। बच्चों की देखरेख के लिए एक केयर टेकर, चार स्टाफ नर्स और एक कुक को लगाया गया है। कुपोषित बच्चों के लिए उनके वजन के हिसाब से डाइट तैयार करने का कुक को निर्देश दिया गया है। वर्तमान में भर्ती फेस वन कंडीशन के सभी बच्चों को दूध में लइया पाउडर, विटामिन और दवाइयां दी जा रही हैं।
इन सभी का हो रहा इलाज
निगोही के रहने वाले ओमप्रकाश की तीन वर्षीय बेटी जयदेवी और चार वर्षीय बेटा, इसी क्षेत्र के गांव गड़वा निवासी महेंद्र की दस माह की जुड़वां बेटियां पिंकी और रिंकी, कांट क्षेत्र के मथुरापुर गांव के रहने वाले पप्पू का आठ माह की बेटा दीपक, रौसर गांव निवासी सुरेश की पांच वर्ष की बेटी पारुल, पुवायां क्षेत्र के कहमारा गांव के रहने वाले आफाक की तीन वर्षीय बेटी सारिवा, शहर के मदराखेल मोहल्ला निवासी तानसेन का आठ माह का बेटा असलम, कांट क्षेत्र के गांव गुरथना निवासी मेषराम का दस माह का बेटा सागर भर्ती है।
सीएमएस ने सीएमओ से की बात
सीएमएस डॉ. एमपी गंगवार भी मानते हैं कि पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती होने वाले बच्चे जिस तरह बढ़ रहे हैं, उसे देखते जगह कम पड़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि बेड बढ़ाने केलिए सीएमओ डॉ. उमेश सिंह यादव से बात की है और जल्दी पर्याप्त व्यवस्था कर ली जाएगी।