जिले से कुपोषण दूर करने की सार्थक पहल हो चुकी है। अतिकुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए बने पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती आठ बच्चे कुपोषण मुक्त हो जाने के बाद घर भेजे जा चुके हैं। केंद्र में अब सिर्फ दो बच्चों को कुपोषण मुक्त करने की कोशिशें चल रही हैं।
जिले में कुपोषण की स्थिति को देखते हुए डीएम शुभ्रा सक्सेना ने संवर्धन योजना के तहत बच्चों को पोषित करने का काम शुरू किया था। इसके लिए पहले तो जिले के सभी कुपोषित बच्चों का सर्वे कराया गया था। इसके बाद अतिकुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र बनवाया गया। इसमें पहले चरण में 10 बच्चों को भर्ती कराया गया था।
इसमें रिंकी, पिंकी, अनूप, साबू, धनपाल, कंचन शाजबीन और अनमोल सही पोषण तत्व मिलने की वजह से अब वे पोषण की श्रेणी में आ गए हैं। इसी वजह उन लोगों की अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। वहीं दिव्यांशी और शोभा का इलाज चल रहा है। केंद्र पर कार्यरत स्टॉफ नर्स रेखा ने कहा कि अतिकुपोषित बच्चों में सबसे अधिक बीमार बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है।
कुपोषित बच्चों के स्वस्थ्य होने पर माताएं पुरस्कृत
पुवायां। कुपोषण से निजात पाने वाले बच्चों की मांओं को शुक्रवार को एसडीएम लालबहादुर ने पुरस्कृत किया। उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों का पूरी तरह से ध्यान रखें।
शुक्रवार को कुपोषण जागरूकता कार्यक्रम के तहत आयोजित कार्यक्रम में एसडीएम ने कहा कि बच्चे राष्ट्र की धरोहर हैं। स्वस्थ बच्चे आगे चलकर स्वस्थ समाज का निर्माण करेंगे। एसडीएम ने बताया कि फरवरी में पुवायां में कुपोषित बच्चों की संख्या 521 थी। एक अति कुपोषित बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह सही होकर घर आ चुका है। शेष बच्चे भी तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। कार्यक्रम में सेहतमंद हो चुके दस बच्चों की मांओं को पुरस्कार प्रदान किया गया।
सीडीपीओ प्रिया सेठ ने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मचारी बच्चों को नियमित वजन कर सेहत का ध्यान रखें। कार्य में ढिलाई नहीं की जानी चाहिए। कार्यक्रम में ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर पूजा गुप्ता, एचईओ अफरोज अहमद, एबीआरसी ममता शुक्ला, आंगनबाड़ी सुपरवाइजर उपमा देवी, ऊषा श्रीवास्तव, स्नेहलता आदि मौजूद रहीं।