नगर के मोहल्ला कोट में रविवार को महेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में क्षत्रिय समाज ने मृत जगेंद्र के परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया है। जिसकी वजह समाज ने इनका गलत आचरण बताया है। समाज की ओर से मीडिया को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि पं. राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां के साथ के क्रांतिकारी रहे ठाकुर रोशन सिंह के वंशजों ने जगेंद्र प्रकरण में जिस तरह सौदा किया है, वह समाज के आचरण के विपरीत है। इस आचरण को इन्होंने कलंक सरीखा भी बताया है।
रविवार को यहां बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में जगेंद्र के पिता और उनके परिवार को क्षत्रिय समाज से बहिष्कृत करने की बात कही गई है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि भविष्य में कोई क्षत्रिय सुमेर सिंह से कोई मतलब नहीं रखेगा। लिखा है कि ठाकुर रोशन सिंह जैसे क्रांतिकारी क्षत्रिय वंश में जन्मे, लेकिन बेटे जगेंद्र सिंह की लाश का सौदा कर सुमेर सिंह ने समाज को कलंकित करने का काम किया है। इससे मोहल्ले के क्षत्रिय लोगों में रोष है। प्रेस विज्ञप्ति पर महेंद्र प्रताप सिंह, पप्पू सिंह, रामेंद्र सिंह, नत्थू सिंह, जितेंद्र सिंह, दिवाकर सिंह, त्रिभुवन सिंह, कौशल सिंह, गोलू सिंह सहित तमाम नाम लिखे हैं।
दूसरी ओर सुमेर सिंह का कहना है कि जगेंद्र के अंतिम संस्कार वाले दिन ही मोहल्ले के कुछ लोग नेताओं को लेकर आए थे और वह रुपये लेकर राजीनामा कराना चाह रहे थे। तब उन्होंने मना कर दिया था, जिसके चलते कुछ लोगों की दलाली नहीं चल सकी थी। गत 24 जुलाई को मोहल्ले की एक बैठक में उन्हें बुलाया गया था और कहा गया कि एसओ राजेश सिंह का तबादला रुकवाने के लिए वह अधिकारियों से कहें और हामी न भरे जाने पर बैठक में मौजूद लोग नाराज हो गए। अब वही लोग इन्हें बहिष्कृत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज से उन्हें कोई बहिष्कृत नहीं कर सकता और वह किसी के दबाव में आने वाले नहीं हैं। बता दें कि हाल ही में इस परिवार ने कोर्ट में धारा 164 के तहत जगेंद्र प्रकरण में बयान देकर आरोपों के दायरे में आए राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा को क्लीन चिट दे दी थी।