शाहजहांपुर। आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े मामले में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णाराज को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। धारा 171 समाप्त कर 188 के तहत आरोप तय किए जाने पर उनके वकील नीरज पाठक ने उच्च न्यायालय में रिवीजन दायर किया था। इस पर उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ न्यायालय की कार्रवाई को अग्रिम आदेश तक स्थगित करने का आदेश दिया। मुकदमे की तारीख 20 अप्रैल तय की गई है।
कृष्णाराज के खिलाफ मामला एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट एडीजे तृतीय किरनपाल सिंह की अदालत में चल रहा है। वह 13 फरवरी को कोर्ट में पेश हुईं थीं। जहां उन पर धारा 188 के तहत आरोप तय करते हुए दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं को कोर्ट ने सुना था और न्यायाधीश ने मामले में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए दो मार्च की तारीख तय की थी। कृष्णाराज के खिलाफ चल रहे मामले में न्यायाधीश ने पत्रावली का अवलोकन कर विवेचना के दौरान एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर आरोप तय करते हुए कहा था कि दो अप्रैल 2014 की रात 9:10 बजे कृष्णाराज ने लोकसेवक रहते हुए निगोही भाजपा कार्यालय के बाहर करीब 150 कार्यकर्ताओं के साथ धारा 144 प्रभावी होने के दौरान स्टीकर लगाकर धारा 144 की अवज्ञा की, जो धारा 188 के तहत दंडनीय है। आरोप तय किए जाने के दौरान कोर्ट में उपस्थित कृष्णाराज ने लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए परीक्षण की मांग की थी। इस पर साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए न्यायाधीश ने दो मार्च 2020 की तारीख तय की की थी।