जलालाबाद। कोलाघाट के नए पुल के लिए 943 किसानों से 23 बीघा जमीन अधिग्रहीत होनी हैं। इस प्रक्रिया में करीब तीन दर्जन ऐसे किसान भी शामिल हैं, जिनकी उपजाऊ जमीनें अधिग्रहण के बाद तीन हिस्सों में बंट जाएगी। शेष जमीन का एक हिस्सा दोनों पुलों के बीच आने से अनुपयोगी साबित होगा।
कोलाघाट पर नया पुल पुराने पुल से 11.5 मीटर के फासले पर बनेगा। नया पुल बनाने के लिए जमीन के अधिग्रहण का कार्य चल रहा है। वहां उपलब्ध प्रत्येक गाटा नंबर के रकबे से 8.5 मीटर चौड़ाई में जमीन ली जा रही है। इस प्रक्रिया में करीब 40 किसान काफी परेशान हैं। उनकी जमीन ज्यादा होने से वह तीन हिस्सों में बंट रही है। एक हिस्सा अधिग्रहण वाली जमीन से पूर्व दिशा में शेष बचेगा। दूसरे अधिग्रहीत हिस्से में नए पुल का निर्माण होगा और पश्चिम दिशा में शेष जमीन का हिस्सा नए और पुराने पुलों के बीच में आ जाएगा।
किसानों के अनुसार, दोनों पुलों के बीच में आ रही उनकी इसी जमीन के पास पुल के कुएं होंगे। कुओं के आसपास की जमीन रेतीली हो जाती है और वहां पानी का भराव बना रहने से गड्ढे भी हो जाएंगे। साथ ही आसपास दो पुल होने से नीचे जमीन तक धूप पहुंचना भी मुश्किल होगी। इस कारण वहां गेहूं की मुख्य फसल या खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा आदि पालेज वाली फसलों की खेती भी नहीं हो सकेगी।
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उजाड़ी गई फसलों का नहीं मिला पर्याप्त मुआवजा
नया पुल बनाने के लिए उपयोग में ली जाने वाली जमीन पर खड़ी फसलों को जमींदोज कर दिया गया है। फसली नुकसान के एवज में प्रभावित किसानों को आठ -आठ हजार रुपये का मुआवजा दिया जाना था, लेकिन कई किसान इसमें मनमानी करने का आरोप लगा रहे हैं। पिछले दिनों नौगवां और रैपुरा गांव के ओमप्रकाश, चंद्रसेन, कमलेश, विश्राम, रामप्रसाद, आदेश आदि ने एसडीएम को पत्र देकर आरोप लगाया था कि गांव अल्लादादपुर बैहारी के रकबे में स्थित उनकी जमीन से फसल उजाड़ दी गई, लेकिन मुआवजा काफी कम दिया गया और कई किसानों को अभी तक वह भी नहीं मिला है। हालांकि, सेतु निगम के जिला परियोजना प्रबंधक बृजेंद्र मौर्य किसानाें के कथन से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि फसली नुकसान का मुआवजा सभी किसानों को दिया गया है और यदि किसी किसान को कोई दिक्कत है, तो वह उनसे मिलकर समाधान करा सकता है।
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जमीन का चार गुना मिलेगा मुआवजा
पुल बनाने के लिए 1.5 हेक्टेयर अर्थात लगभग 23 बीघा जमीन अधिग्रहीत होनी है। बैनामा करने वाले किसानों को जमीन के सर्किल रेट का चार गुना भुगतान मुआवजा के तौर पर होना है। नदियों की बाढ़ से प्रभावित रहने के कारण यहां जमीन का सर्किल रेट भी कम है। मौजूदा समय यहां की जमीन का सर्किल रेट 13 लाख रुपया प्रति हेक्टेयर है। इस हिसाब से यदि किसी काश्तकार की एक बीघा जमीन जाती है तब उसे 3.38 लाख रुपये मुआवजा देय होगा।
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पुराने पुल को अधिग्रहीत जमीनों का नहीं दिया गया मुआवजा
खास यह है कि कोलाघाट के पुराने पुल के निर्माण के दौरान किसी काश्तकार को कोई मुआवजा नहीं दिया गया। हालांकि, उस दौरान पुल की अत्यंत आवश्यकता के चलते इसको लेकर कभी कोई विरोध भी नहीं हुआ। अब नये पुल का निर्माण में तमाम ऐसे किसानों की जमीनें भी जा रही हैं, जिनकी जमीन का बड़ा हिस्सा पुराने पुल में जा चुका है।
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अधिग्रहण के बाद हमारी करीब चार डिसमिल जमीन दोनों पुलों के बीच बच गई है, लेकिन वह बेकार हो जाएगी। सरकार उन सभी किसानों को दोनों पुलों के बीच आने वाली जमीन का भी मुआवजा दे।
-चंद्रसेन, नौगवां
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ज्यादातर किसानों की यही समस्या है कि पुलों के बीच बचने वाली जमीन किसी काम की नहीं रहेगी। इस जमीन पर फसल पैदा करना कठिन होगा। इसलिए सरकार को इसका भी मुआवजा देना चाहिए।
-आदेश कुमार, नौगवां
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हमारी जमीन पुराने पुल में जा चुकी है। अब उतनी ही जमीन नये पुल में जा रही है। कुल मिलाकर हमारी 30 मीटर से ज्यादा जमीन चली गई, लेकिन मुआवजा सिर्फ आठ मीटर का मिल रहा है।
-कमलेश, रैपुरा
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पुल के लिए शासन के आदेशानुसार जरूरत के मुताबिक अधिग्रहीत जमीन का बैनामा कराकर किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है। इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है कि मुआवजा मिलने में किसानों को कोई परेशानी न हो। इसके बाद भी उन्हें कोई समस्या आती है तो अधिकारियों से दिशा निर्देश लेकर उसका समाधान कराया जाएगा।
-पैगाम हैदर, तहसीलदार, जलालाबाद
जलालाबाद में बना कोलाघाट पुल। फाइल फोटो
जलालाबाद में बना कोलाघाट पुल। फाइल फोटो
जलालाबाद में बना कोलाघाट पुल। फाइल फोटो