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‘ज्ञान को दिनचर्या में शामिल करना होगा’

Sat, 14 Mar 2015 08:16 PM IST
शाहजहांपुर।
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 इंडो-अमेरिकन एजुकेशन कार्यक्रम के तहत जॉन नेव सीनियर सेकेंड्री स्कूल में शनिवार को शिक्षा की नई तकनीक पर व्याख्यान हुआ। इसमें हावर्ड यूनिवर्सिटी के शोधार्थी निकोलस एडवर्ड्स ने शिक्षा की नई तकनीक और भारतीय शिक्षा में भविष्य में संभावित परिवर्तनों के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।
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निकोलस ने कहा कि बाल केंद्रित शैक्षणिक व्यवस्था ज्ञान सृजन के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि 21वीं शताब्दी विशिष्टताओं और विलक्षणताओं से भरी है। ज्ञान अपने चरम पर है। कंप्यूटर की वजह से सूचनाओं की उपलब्धता बढ़ गई है। विडंबना यह है कि सूचनाओं के संग्रह ने ज्ञान को दबा दिया है। इसलिए बच्चों में जिज्ञासा जगानी होगी। जिज्ञासा से ही ज्ञान पिपासा शांत होने के साथ ही बच्चों को प्रेरणा मिलती है। ज्ञान को दिनचर्या में शामिल करना होगा।
एसएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्रा ने प्रो. एडवर्ड द्वारा विकसित बाल केंद्रित अंग्रेजी शिक्षण विधि की सराहना की। शहर विधायक सुरेश खन्ना ने कहा कि अंग्रेजी शिक्षण के क्षेत्र में यह अनोखा प्रयोग शहीदों की नगरी के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
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निकोलस भारतीय छात्रों के लिए अंग्रेजी भाषा के आसान अध्ययन के लिए पैडागोगी विधि विकसित कर रहे हैं। इससे पूर्व कोरियाई छात्रों के लिए वह ऐसी ही व्यवहारिक शिक्षण विधि विकसित कर चुके हैं। सबसे पहले निकोलस का स्वागत भारतीय परंपरा के अनुसार तिलक लगाकर और फूलमालाएं पहनाकर किया गया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं।
इस दौरान निदेशक डॉ. आशीष मैसी, प्रधानाचार्य सपना आशीष ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर सुनीता द्विवेदी, ब्लॉसम जोसेफ, डॉ. विकास पांडेय, विशाल भंडारी, मदन राठौर, संजीव  मिश्रा, शशिकांत श्रीवास्तव, रमा गुप्ता, दीपांजलि जॉन, हिमांशु भटनागर आदि मौजूद रहे।

भारत में शिक्षा का परिदृश्य पश्चिमी देशों से भिन्न
शाहजहांपुर। एसएस कॉलेज में पहुंचे निकोलस एडवर्ड्स ने कहा कि पश्चिमी देशों में शिक्षा का परिदृश्य भारत से अलग है। जिले में शिक्षा की चुनौतियां बहुत अधिक हैं। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा का लक्ष्य परीक्षा पास करना भर है। यहां 90 प्रतिशत अंक लाना ही शिक्षा की सफलता है। कहा कि छात्रों में ज्ञान की समझ विकसित नहीं हो पा रही है। छात्र में रटने के बजाय समझ और प्रश्न पूछने की जिज्ञासा उत्पन्न होना ही शिक्षा का लक्ष्य होना चाहिए। अध्यापक को अपनी कक्षा में सबसे पहले उद्देश्यों का निर्धारण करना चाहिए। उसके अनुरूप गतिविधियां कक्षा में होनी चाहिए।
गुड़गांव से आए शिक्षाविद् डॉ. हिमांशु ने कहा कि कक्षा में छात्र अधिक से अधिक प्रयोग करने का मौका मिलना चाहिए। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र, डॉ. सभाजीत सिंह, डॉ. मीना शर्मा, डॉ. प्रभात शुक्ल, डॉ. विकास पांडेय, विभागाध्यक्ष डॉ. एमके वर्मा, डॉ. शंकरलाल गुप्ता, डॉ. मनोज मिश्रा, बलराम वाजपेयी, डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री आदि मौजूद रहे।
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