जनपद में वसंत पंचमी पतंगबाजी के रूप में उल्लासपूर्ण ढंग से मनाई जाती है। पतंगबाजी के लिए युवाओं और बच्चों में खासा क्रेज रहता है, इसके लिए सभी कई दिन पहले से ही तैयारियों में जुट जाते हैं। रविवार को आधी रात तक लोगों ने पतंगें, चरखी, माझा, रील की खरीदारी की। सोमवार सुबह होते ही छतों से बच्चों और युवाओं की वो काटा की आवाजें सुनाई देने लगीं थीं। कई स्थानों पर तो लोगों ने छतों पर साउंड सिस्टम लगाकर फिल्मी गीतों का आनंद लेते हुए पंतगबाजी का लुत्फ लिया। वहीं, पतंगें लूटने के लिए भी लोग मचलते रहे। ऐसे लोगों को पतंगें उड़ाने के बजाय पतंगें लूटने में मजा आ रहा था। कई स्थानों पर युवतियों ने भी पतंगबाजी कर त्योहार का आनंद लिया। सुबह तड़के हल्की रोशनी में सर्दी की परवाह किए बिना लोगों ने पतंगों का आनंद लेना शुरू कर दिया था। जैसे-जैसे समय बीतता गया और धूप खिलती गई, उसी हिसाब से पतंगबाजी भी चरम पर पहुंचने लगी। छतों पर साउंड सिस्टम पर फिल्मी गाने बजने लगे, वहीं युवाओं और बच्चों के साथ बुजुर्गों ने भी छत पर पहुंचकर पुराने दिनों की याद की और पतंगें उड़ाने के लिए हाथ खोले। महिलाओं और युवतियों ने पीले रंग के वस्त्र पहनकर पतंगबाजी का लुत्फ लिया। हालांकि घरवालों को पतंगबाजी के आगे भोजन करने की चिंता नहीं थी, इसके बावजूद अधिकांश घरों में तहरी पकाई गई। कुछ लोग ऐसे भी दिखाई दिए, जिन्हें पतंगें उड़ाने सेे अधिक पतंगें लूटने का शौक था। खासतौर पर बच्चों ने पतंगें लूटने में अधिक दिलचस्पी दिखाई। बाजार में तो अच्छे-भले लोग और दुकानदार भी सड़क पर गिरी पंतगें लूटने में गुरेज नहीं कर रहे थे। वहीं, दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों और दुकानदारों ने भी मौका मिलते ही पंतगबाजी कर त्योहार का आनंद लिया। अधिक छोटे बच्चों ने गैस के गुब्बारे उड़ाकर आनंद लिया।