फाइनल में जीतने के बाद तिरंगे के साथ खुशी। स्रोत: स्वयं
जैतीपुर (शाहजहांपुर)। अगरोली गांव के पहलवान रामफल चौधरी की सबसे छोटी बेटी खुशी चौधरी ने तुर्किये के इस्तांबुल शहर में हुई अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता के फाइनल में ईरान की पहलवान को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया।
खुशी के पिता रामफल चौधरी मूल रूप से हरियाणा के जींद जिले की सफीदों तहसील के गांव अशर्फाबाद के रहने वाले हैं। पिता रामफल चौधरी लोगों को मिठाई खिलाते हुए कई बार भावुक हो उठे और बड़े गर्व से बेटी की कामयाबी की कहानी सबको बताते रहे।
उन्होंने बताया कि युवावस्था में उनकी गिनती हरियाणा के अच्छे पहलवानों में होती थी। एक दशक बाद 1998 में यहां आकर अगरोली गांव में आकर बस गए। उन्होंने अपने सभी बच्चों को खेल जगत में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। खुशी बचपन से खेलकूद की शौकीन थी।
उसके शौक को देखते हुए 2018 में उसे हरियाणा के साईं सेंटर में अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी गीता फोगाट और बबीता फोगाट के पास प्रशिक्षण के लिए भेजा।
उन्होंने बताया कि फोगाट बहनों से उसने कुश्ती के गुर सीखे और और बाद में मुकाबले जीतने शुरू किए तो पीछे मुड़कर नहीं देखा और निरंतर अभ्यास कर आगे बढ़ती रही। गत तीन वर्ष से खुशी अपने कोच राजेश के साथ अभ्यास कर रही हैं। हाल ही में 24 अगस्त को खुशी ने हरिद्वार में हुई कुश्ती की नेशनल चैंपियनशिप में 64 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर उसने तुर्किये में हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपनी जगह बनाई थी। 19 सितंबर को वहां जाकर उसने इतिहास रच दिया। खुशी की मां सुनीता को भी गांव कई महिलाओं ने बधाई दी।
भाई-बहन कमा रहे नाम
रामफल चौधरी ने बताया कि उनके छह बेटे और पांच बेटियों में खुशी सबसे छोटी हैं। खुशी के बड़े भाई अमित चौधरी पुवायां में क्रिकेट अकादमी चलाते हैं। एक भाई हरियाणा के सोनीपत में बॉक्सिंग की कोचिंग देते हैं। एक अन्य भाई और बहन डॉक्टर हैं।
फाइनल में जीतने के बाद तिरंगे के साथ खुशी। स्रोत: स्वयं