पांच लाख रुपये और इससे अधिक सालाना टर्नओवर वाले व्यापारियों को वाणिज्य कर विभाग में पंजीकरण अनिवार्य होने के बावजूद व्यापारी इस व्यवस्था को भाव नहीं दे रहे हैं। पिछले दिनों इसके लिए लगाए गए विशेष कैंपों में तमाम व्यापारियों ने पंजीकरण आवेदन लिए, लेकिन भरकर जमा नहीें किए। अफसरों का अनुमान है कि करीब दो हजार व्यवसायिक फर्में रजिस्ट्रेशन कराए बगैर अपना धंधा कर रही हैं। ऐसी फर्मों और उनके संचालकों को कर देयता के दायरे में लाने के लिए विभागीय अधिकारी दोबारा शिविरों की शृंखला शुरू करने की तैयारी में जुटे हैं। जिले में खोखा-पटरी दुकानदारों को छोड़कर छोटे-बड़े करीब 20 हजार व्यापारी हैं। इनमें दस हजार से अधिक ऐसे व्यापारी हैं, जिनका वार्षिक व्यवसाय पांच लाख रुपये और इससे अधिक है। उप्र मूल्य संवर्धित कर अधिनियम 2008 की धारा-3 में निहित प्राविधानों के अनुसार पांच लाख रुपये से अधिक टर्न ओवर होने अथवा राज्य के बाहर माल की खरीद-बिक्री किए जाने पर विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य घोषित किया गया है।
शिविरों में अपेक्षा से कम पहुंचे व्यापारी
उपरोक्त श्रेणी के व्यापारियों को विभाग में फर्म रजिस्टर्ड कराने के लिए गत वित्त वर्ष में शहर के विभिन्न स्थानों समेत जिले के अन्य नगरों और कसबों में लगभग 40 कैंप लगाए गए। शहर के चौक, खिरनीबाग और जलालनगर में व्यापार संगठनों द्वारा प्रायोजित शिविरों में तमाम व्यापारी उमड़े। उन्होंने रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म भी लिए, लेकिन रजिस्ट्रेशन केवल 1300 हो सके।
माह के अंत में दोबारा लगेंगे पंजीकरण शिविर
वाणिज्य कर अधिकारियों का अनुमान है कि पांच लाख रुपये और इससे अधिक सालाना टर्नओवर दो हजार से अधिक ऐसे व्यापारी हैं, जिन्होंने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है। डिप्टी कमिश्नर अमित मोहन के अनुसार दो हजार ऐसे व्यापारी सूचीबद्ध किए गए हैं, जिनका वार्षिक व्यवसाय सात से आठ लाख रुपये होने के बावजूद रजिस्ट्रेशन नहीं करा रहे हैं। इनके लिए माह के अंत में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि चार से पांच लाख रुपये टर्न ओवर श्रेणी के बार्डर लाइन वाले व्यापारियों को बाद में रजिस्ट्रेशन की परिधि में लाया जाएगा।