सांस्कृतिक संस्था अनुभूति के तत्वावधान में मुन्नूगंज स्थित कार्यालय पर कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि ओम प्रकाश अडिग ने संचालन डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री ने किया।
इस अवसर पर गीतकार अडिग ने अपनी बात इस तरह रखी,
प्रीति ने तुमको कई खत लिखे, तुमने पाए नहीं ये अलग बात है,
मर गए हम गुनाहों की दहलीज पर, मौत आई नहीं ये अलग बात है।
सुशील दीक्षित विचित्र ने कहा,
अभी दांव पर लगी हुई आजादी है
जाल बिछाकर बैठ चुकी बरबादी है।
हरीओम शुक्ल ओमी ने कहा -
आज नीतियों में परिवर्तन करना बहुत जरूरी है
रिपु शोणित से मां का अर्चन करना बहुत जरूरी है।
डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री ने कुछ यूं सुनाया,
मौसम है बदहवास हमारे आसपास
सशंकित विभीषण हैं सोचते सत्य का साथ झंझट पचास।
मनोज मंजुल ने फरमाया,
इक्कीसवीं सदी का है ये भारत देखिए,
खंजर लिए हैं जो कल पकड़ते थे तितलियां।
गोष्ठी में लालित्य पल्लव भारती, चंद्र प्रकाश वाजपेयी, प्रशांत वाजपेयी, चंद्र मोहन पाठक आदि ने भी काव्य पाठ किया। इससे पूर्व कृभको श्याम फर्टिलाइजर लिमिटेड के अधिकारी प्रमोद प्रमिल ने मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप जलाकर गोष्ठी का शुभारंभ किया। आयोजक विवेक टिकैत ने आभार व्यक्त किया। व्यवस्था में विक्रम श्रीवास्तव, पूनम श्रीवास्तव, अंजू श्रीवास्तव, मानवी आदि का योगदान रहा।