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मानवता का पैगाम लेकर आए थे प्रभु यीशु

Fri, 25 Dec 2015 11:02 PM IST
शाहजहांपुर।
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शांति के अग्रदूत प्रभु यीशु मसीह का जन्मोत्सव श्रद्धा, विश्वास और उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च में उमड़े जनसमुदाय ने आराधना सभा में शिरकत कर प्रभु के वचन सुने और उनका गुणगान किया। हल्की सर्दी के बीच खिली धूप से ईसाई समाज की खुशी और भी दोगुनी हो गई।
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इस अवसर पर पादरी अशोक श्रेष्ठा ने प्रभु यीशु के वचन सुनाते हुए विश्व शांति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आपसी प्रेम और शांति के लिए सभी को एक-दूसरे के धर्मों का आदर करना चाहिए। प्रभु यीशु का अवतरण भी इसी कारण हुआ। उन्होंने शांति और प्रेमभाव का संदेश देकर मानवता का पाठ पढ़ाया। हमें प्रभु के बताए रास्ते पर चलने की जरूरत है। आपसी प्रेम और सौहार्द से ही आतंकवाद से मुक्ति पाई जा सकती है। श्री श्रेष्ठा ने कहा कि देश और समाज की तरक्की के लिए जाति-धर्म से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है।
इससे पूर्व सुबह 10 बजे चर्च में आराधना सभी आरंभ हुई। सबसे पहले पांच कैंडल जलाकर यीशु मसीह को याद किया गया। प्रार्थना के बाद पादरी ईएम पॉल ने बाइबिल का पाठ किया। पास्टरीय प्रार्थना पादरी सुरेश मिल्टन ने की। इसी कड़ी में शान, पलीशा सारा पॉल आदि ने गीत प्रस्तुत किए। अनुज डीन के संचालन में चले संगीत कार्यक्रम के बाद एनटीआई के निदेशक डॉ. आशीष मैसी, प्रधानाचार्य सपना मैसी, रिलायंस परियोजना के अधिकारी सुनील एस कुमार ने पादरी अशोक श्रेष्ठा, ईएम पॉल और सुरेश मिल्टन के साथ क्रिसमस केक काटा और सभी को बधाई दी। आयोजन में सुधीर जॉन, अमित सनवालिया, याकूब एडवर्ड, अनिल सी दास, निरुपमा महंत, सुनीता जे सिंह, अभिषेक श्रेष्ठा आदि का योगदान रहा।
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नवविवाहिताओं ने कैंडल जलाकर किया आगाज
सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च में क्रिसमस पर्व का आगाज पांच नवविवाहिताओं सुनीता अभिषेक श्रेष्ठा, नलिनी अनुज डीन, एल्विना अनिल दास, श्रीमती डी निर्दोष आदि ने पांच कैंडल जलाकर किया। इसके बाद इन्हीं नवविवाहिताओं ने सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

झांकी के समक्ष जलाईं कैंडल्स
चर्च के बाहर प्रभु यीशु मसीह के जन्म पर आधारित सजाई गई झांकी देखने और मन्नतें मांगने के लिए  महिलाएं, बच्चे और युवा दिनभर उमड़ते रहे। झांकी के सामने सभी ने सैकड़ों मोमबत्तियां जलाकर सुख-शांति की कामना की। मोमबत्तियां जलाकर दुआएं मांगने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। चर्च खुलने पर अंदर भी कैंडल जलाकर प्रभु यीशु को याद किया गया।

ऐसे बना क्रिसमस का विशाल केक
क्रिसमस केक काटने के लिए मसीह समाज के लोग अपने घरों से केक का एक-एक पीस लेकर चर्च पहुंचे थे। चूंकि ईसाई समाज की संख्या काफी है, इसलिए एक-एक पीस एकत्र होते-होते चर्च का क्रिसमस केक विशाल होता चला गया और अंत में वही केक तीनों पादरी अशोक श्रेष्ठा, ईएम पॉल, सुरेश मिल्टन, मुख्य अतिथि एनटीआई के डायरेक्टर डॉ. आशीष मैसी और रिलायंस परियोजना के अधिकारी सुनील एस कुमार ने काटा। बाद में उपस्थितजनों में बांटा गया।

गुलाब और मोमबत्तियों की जमकर हुई बिक्री
चर्च के बाहर सुबह तड़के से ही गुलाब के फूलों, फूलों के गुलदस्तों और मोमबत्तियों के स्टाल सज चुके थे। ज्यों-ज्यों भीड़ बढ़ती गई, त्यों-त्यों इनकी बिक्री भी बढ़ती गई। युवाओं और बच्चों ने 10-10 रुपये में एक-एक गुलाब खरीद कर अपने मित्रों को भेंट किए और क्रिसमस की मुबारकबाद दी। इसी तरह मोमबत्तियां खरीद कर चर्च तथा परिसर में सजी झांकी के समक्ष उन्हें जलाकर मन्नतें मांगीं।

देर रात तक चला क्रिसमस मिलने का सिलसिला
होली की ही तरह एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देने की परंपरा क्रिसमस पर भी है। दोपहर प्रार्थना-आराधना आदि कार्यों के बाद सभी जाति-धर्मों के लोगों ने अपने ईष्ट-मित्रों एवं सगे-संबंधियों के घर जाकर न सिर्फ मुबारकबाद दी, बल्कि गुझिया, केक, फल, चाट-पकौड़ी समेत अन्य पकवानों का आनंद लिया। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।  इसाई समुदाय के घरों में भारी-भरकम क्रिसमस ट्री भी सजाए गए।

चर्च की सजावट देखने को उमड़े लोग
क्रिसमस त्योहार पर सजाए गए चर्च को देखने के लिए युवाओं और बच्चों का तांता दिनभर लगा रहा। दोपहर बाद तो यह संख्या सैकड़ों में पहुंच चुकी थी। व्यवस्था बनाए रखने के लिए पादरियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। शाम सात से नौ बजे तक चर्च खोला गया। फिर चर्च की जगमगाहट देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ीे।
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