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कोलाघाट पुल : वाहनों की अनुमति मिलने पर अभी लगेंगे कई महीने, शनिवार से पैदल निकल सकेंगे

सार

सब कुछ ठीक रहा तो कोलाघाट पुल को एक अक्तूबर से पैदल यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।पुल की जांच कर रहे सीआरआरआई के अधिकारियों से अभी वेल फाउंडेशन की रिपोर्ट नहीं मिली है।दूरदराज के लोगों को तो दोपहिया और हल्के चार पहिया वाहनों के चलने की अनुमति मिलने से ही लाभ होगा।
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शाहजहांपुर/जलालाबाद। सब कुछ ठीक रहा तो कोलाघाट पुल को एक अक्तूबर से पैदल यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। उप्र राज्य सेतु निर्माण निगम के महाप्रबंधक व मुख्य परियोजना प्रबंधक संदीप गुप्ता ने बताया कि पुल के नवनिर्मित पिलर समेत कई पुराने पिलर में टेढ़ापन आ गया है जो मानक से अधिक है। सीआरआरआई की टीम तकनीकी दृष्टि से दोषपूर्ण 15 पिलर के भूमिगत हिस्सों की जांच करेगी। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत कार्य होंगे। इसके बाद भारी वाहनों के यातायात को अनुमति दी जा सकेगी। इसमें छह महीने भी लग सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि कोलाघाट पुल ढहने के बाद सात नए पिलर बनाकर उनसे पुराने पुल के दोनों हिस्सों को जोड़ा है। ऊपरी तौर पर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन भारी वाहनों का यातायात शुरू कराने से पहले सीआरआरआई (केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान) से पुल की जांच कराई जा रही है। अभी तक पुल के ऊपरी हिस्से की दो जांच रिपोर्ट आ चुकी हैं। अब वेल फाउंडेशन की रिपोर्ट आना शेष है। पहली रिपोर्ट के आधार पर पुल से पैदल यात्रियों का आवागमन शुरू कर देने की अनुशंसा की गई है। विभागीय अधिकारियों की टीम मौके पर जाकर एक अक्तूबर से पुल पर पैदल आवागमन शुरू करा देगी। प्रयास है कि पुल से बाइक आदि दोपहिया वाहनों का भी संचालन शुरू कराया जा सके।
मुख्य परियोजना प्रबंधक के अनुसार पुल से सामान्य यातायात बहाल होने में छह माह से अधिक का समय लग सकता है। पुल की जांच कर रहे सीआरआरआई के अधिकारियों से अभी वेल फाउंडेशन की रिपोर्ट नहीं मिली है। यह जांच 15-20 दिन में पूरी हो जाएगी। हालांकि पुल के ऊपरी हिस्से में करीब 16 करोड़ रुपये के मरम्मत कार्य होने हैं, जिन्हें पूरा करने में पांच-छह माह लग जाएंगे। वेल फाउंडेशन की अंतिम जांच रिपोर्ट अहम है क्योंकि उसी के आधार पर पुल से सामान्य यातायात शुरू कराने का निर्णय लिया जाएगा। सभी पिलर की भूमिगत सतह की जांच में में कमी पाई गई तो उसे ठीक करने में अतिरिक्त समय लगेगा। इसीलिए क्षेत्र के लोगों को आवागमन में तात्कालिक राहत देने के लिए शनिवार से पुल पर पैदल यातायात शुरू कराने का निर्णय किया गया है।
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मंत्री जितिन ने पैंटून पुल बनाने के दिए आदेश
सेतु निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक ने बताया कि पुल पर जब तक हल्के और भारी वाहनों का यातायात शुरू नहीं होता, लोगों को आवागमन की परेशानी से बचाने के लिए लोनिवि मंत्री जितिन प्रसाद ने विभागीय अभियंताओं को पैंटून पुल बनाने के आदेश दिए हैं। लोनिवि के अधिशासी अभियंता (निर्माण खंड-1) राजेश चौधरी ने बताया कि पैंटून पुल के लिए करीब 32 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार कर लिया है लेकिन अभी रामगंगा व बहगुल नदियों में पानी अधिक होने से अक्तूूबर माह के दूसरे सप्ताह तक पैंटून पुल बनाने का काम शुरू करा दिया जाएगा।
पैदल यातायात शुरू कराने का स्वागत
सराफा व्यापारी सुधीर कुमार गुप्ता, पूर्व ब्लॉक प्रमुख मिर्जापुर पुरुषोत्तम सिंह वर्मा, व्यापारी अंकुश गुप्ता, सुबोध कुशवाहा समेत तमाम लोगों ने कहा कि पैदल यात्रियों को अनुमति देने का फैसला स्वागत योग्य है। हालांकि पुल से पैदल निकलने की अनुमति दिए जाने से आसपास के लोगों को ही फायदा मिलेगा। दूरदराज के लोगों को तो दोपहिया और हल्के चार पहिया वाहनों के चलने की अनुमति मिलने से ही लाभ होगा। लोगों का कहना है कि पुल से केवल पैदल निकलने की अनुमति दिए जाने से लगभग दो किमी लंबे पुल को पार करना बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों के वश का नहीं होगा। ऐसे में हल्के वाहनों को भी निकलने की अनुमति मिले। पैदल यात्रियों के कारण पुल के दोनों ओर डग्गामार वाहन चलने शुरू हो जाएंगे। इनके स्टैंड बनवाने और डग्गामार वाहनों की मनमानी पर भी रोक लगे।
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