बड़े-बुजुर्ग और डॉक्टर सभी कहते हैं कि दूध पीना सेहत के लिए फायदेमंद है। बात भी सही है। पर कुछ मुनाफाखोरों ने हमारी सेहत में सेंधमारी शुरू कर दी है। अब दूध पीना फायदे का सौदा न होकर नुकसानदायक हो गया है। जिले में बिक रहा दूध या तो मिलावटी है या मानकों के अनुरूप नहीं है। इस बात का खुलासा खाद्य सुरक्षा विभाग की एक रिपोर्ट ने किया है। जनवरी से अगस्त 2017 तक जिले भर में अलग-अलग स्थानों से लिए गए दूध के नमूनों की जांच रिपोर्ट इसकी पुष्टि करने के लिए काफी है। आठ महीने के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिले से दूध के कुल 54 नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे थे। इनमें 44 नमूनों की अब तक रिपोर्ट आ चुकी है। 44 में से 30 नमूने जांच में फेल हो गए हैं।
खाद्य और पेय पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की होती है। मिलावट करने वालों को सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। इसके बावजूद मिलावट का धंधा करने वाले अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। मिलावटी दूध से बच्चे-बड़ सब बीमार हो रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर मिलावट करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर नमूने जांच को प्रयोगशाला भेजता है। आठ महीने के दौरान सबसे ज्यादा दूध के 15 नमूने शहरी क्षेत्र से भेजे गए थे। इन 15 नमूनों में से 13 नमूने जांच में फेल हो गए हैं। कई नमूने तो ऐसे पाए गए हैं जो पीने योग्य ही नहीं था। कुल 54 में से अब तक 44 नमूनों की रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा विभाग को मिल चुकी है। इसमें 30 नमूने फेल पाए गए हैं। इनमें मिलावटी के साथ सिंथेटिक दूध भी है। 10 नमूनों की रिपोर्ट मिलनी अभी बाकी है। नमूने फेल होने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।