शाहजहांपुर। सरकारी स्कूलों में बेहतर सुविधाएं देने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की फाइलों में सब ठीक होने के दावे के विपरीत जमीनी हकीकत इससे अलग है। स्कूलों में ऊपर से लेकर अंदर तक भवन खस्ताहाल हैं। गुमराह करने के लिए प्लास्टर कर रंगाई-पुताई कर खेल कर दिया गया है। ऐसे में बच्चों और शिक्षकों के सिर के ऊपर हमेशा खतरा मंडराता रहता है।
कैसी है पाठशाला मुहिम के तहत परिषदीय विद्यालयों की हालत देखने निगोही विकासखंड के कन्या पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पहुंचे। विद्यालय का निर्माण वर्ष 2001 में किया गया था। सरकारी दावों के विपरीत यहां मजबूत स्कूल की दीवारें व छत जर्जर मिलीं। तीन कमरे निष्प्रयोज्य हो चुके थे। लिंटर और दीवारें चटकी थीं। लिंटर का नीचे का हिस्सा भी टूटा था और सरिया दिखाई दे रहा था।
यहां पर कक्षा छह से आठ तक की 137 छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं। लिंटर ओर दीवारें गिरताऊ होने की स्थिति में बच्चों ने पढ़ने से इन्कार कर दिया तो अध्यापकों ने विद्यालय में बने अतिरिक्त कक्ष और बरामदे में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। यहां बरामदा टूटा होने के कारण खतरा बना हुआ है। बारिश होने पर भवन की छतें टपकती हैं।
प्रधानाध्यापक कुसुम कुमारी वर्मा ने बताया कि विद्यालय की हालत के बारे में कई बार उच्च अधिकारियों को मौखिक और लिखित में सूचित दी जा चुकी है।
जर्जर भवन की दरक गईं दीवार
जैतीपुर। प्राथमिक विद्यालय लोचन नगला की दीवारें दरकी हुई हैं। बारिश होने पर छत टपकने लगती हैं। गत वर्ष प्रधान ने कायाकल्प के तहत मरम्मत कार्य कराया था। उस समय दीवारों पर प्लास्टर कराकर इतिश्री कर ली गई। ऊपर से बेहतर कर दिया, लेकिन अंदर की गल चुकी सरिया की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय की दीवारों को सीमेंट के बजाये मिट्टी से चुनकर प्लास्टर कर दिया गया। इससे हादसा होने का खतरा रहता है। संवाद
गंदगी का अंबार, शौचालय तक टूटे पड़े
रोजा। ग्राम पंचायत चौढ़ेरा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय की स्थिति भी बेहतर नहीं है। स्कूल परिसर में गंदगी का अंबार है। स्कूल में कक्षा छह से आठ तक 270 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। उनके स्वास्थ्य की परवाह नहीं करते हुए सफाई नहीं होती है। विद्यालय परिसर में बने दो कमरों के बीच पड़ी खाली जगह में कूड़े का ढेर मिला। पीने के पानी को लगी टंकियों के पास गंदगी फैली हुई थी। शौचालय गंदे थे। पुरुष शीट भी टूटी थी। दिव्यांग शौचालय से पानी का निकास तक नहीं था। शौचालय के बाहर लगे टायल्स उखड़े पड़े थे। शिक्षिका नवनीत कौर ने बताया कि यहां सफाई कर्मचारी नहीं आता।
कई गांवों में सरकारी स्कूलों के शौचालय बदहाल
जलालाबाद। नूरपुर करही और मगटोरा गांव के स्कूलों के शौचालयों के दरवाजे टूट चुके हैं। ऐसे में छात्र-छात्राएं वहां जाने से कतराते हैं। शिक्षक भी शौचालय का प्रयोग नहीं करते। यही हाल सिकंदरपुर, ककरहा और ठिगरी गांव के स्कूलों का है। नूरपुर करही स्कूल के प्रधानाध्यापक अरविंद कुमार ने बताया कि शौचालय के टूटे दरवाजे को बदलवाने की व्यवस्था की जा रही है। एक अन्य अध्यापक ने बताया कि सफाईकर्मी विद्यालय में सफाई कार्य तभी करने आते हैं, जब इसके लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं। संवाद
जर्जर स्कूलों को पूर्व में चिह्नित कर लिया गया है। जहां स्थिति ठीक नहीं है, वहां पर प्रधानाध्यापकों को बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर बैठाने के लिए निर्देशित किया गया है।
- दिव्या गुप्ता, बीएसए
जलालाबाद में स्कूल का जर्जर शौचालय। संवाद
जलालाबाद में स्कूल का जर्जर शौचालय। संवाद
जलालाबाद में स्कूल का जर्जर शौचालय। संवाद