शाहजहांपुर। विश्व साइकिल दिवस तीन जून को होगा। साइकिल का उपयोग लोग शौक या बजट को नियंत्रित रखने के लिए नहीं कर रहे हैं, बल्कि रोगों से बचाव व स्वस्थ रहना भी एक वजह है। कोरोना काल के बाद से सक्रिय साइकिल ग्रुपों में हर उम्र के लोग साइकिल दौड़ा रहे हैं। 40 से पार वाले बीमारियों से बचने और किशोर व युवक फिट रहने के लिए साइकिल चलाते हैं।
कोरोना की लहर आने के बाद लोगों ने फिट रहने के लिए साइकिल का हैंडल पकड़ लिया। साइकिलिंग को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हुए वजन को कंट्रोल करने के साथ ही तनाव को दूर किया। आमतौर पर जिम में पसीना बहाने वाले लोगों ने खुले में साइकिल चलाना शुरू किया। साइकिल चलाने से मांसपेशियां मजबूत होने के साथ ही बीपी, शुगर और अन्य कई बीमारियों से धीरे-धीरे निजात मिलती है।
कोविड के समय एसएस कॉलेज के शिक्षक डॉ. विकास खुराना ने साइकिल क्लब की स्थापना की। इसमें पुरुषाें से लेकर महिलाएं तक सहभागी बनीं। लोगों ने सुबह के समय साइकिल चलाना अपना शौक बना लिया। कोरोना के समय साइकिल के कारोबार में भी उछाल आया था। लोगों ने ह्दयघात, अवसाद, मधुमेह, मोटापा और गठिया जैसी कई गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए साइकिल को दौड़ाना शुरू किया। इसमें तमाम युवाओं की टोली आज भी साइकिल को दौड़ा रही है। लोग स्वस्थ रहने के लिए साइकिल को चलाते हैं।
मधुमेह, बीपी, ह्दयघात समेत कई रोगों से मिलता है छुटकारा
कोविड के समय साइकिल को चलाने वाले ज्यादा थे, लेकिन अब भी समूह में साइकिल चलाते हैं। बचपन से साइकिल चलाते आए हैं। इससे मन प्रसन्न रहता है। मानसिक तनाव से छुटकारा समेत कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है। - गजेंद्र गंगवार, जिलाध्यक्ष-शाहजहांपुर साइकिल क्लब
साइकिल चलाने से मसल्स पॉवर ठीक रहती है। कैलोरी बर्न होने से मोटापा नहीं होता है। शुगर की बीमारी होने की आशंका कम रहती है। मधुमेह, बीपी, ह्दयघात समेत कई रोगों से छुटकारा मिलता है। - डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य-राजकीय मेडिकल कॉलेज
कोविड के समय साइकिल की बिक्री में उछाल आया था। गांवों के लोग तो साइकिल लेकर ही नहीं जाते हैं। वर्तमान समय में मात्र बच्चों के लिए साइकिल खरीदी जा रहीं हैं। - तनवीत सिंह, साइकिल व्यवसायी
तीन महीने तक 15 किलोमीटर तक रोजाना साइकिल चलाने से शरीर की क्षमता दस साल पहले की उम्र वाली हो जाती है। साइकिलिंग मोटापा कम करने में सहायक है। - डॉ. विकास खुराना, संस्थापक साइकिल क्लब
मिस्त्री हुए बेरोजगार, बेच रहे सब्जी और फल
साइकिल का उपयोग कम होने पर मिस्त्री भी बेरोजगार हो गए। पूर्व में साइकिल की दुकानें लगभग हर रास्ते पर मिलती थीं, लेकिन अब मरम्मत का कार्य साइकिल बेचने वाली दुकानों तक ही सिमटकर रह गया है। स्टेशन रोड पर साइकिल की मरम्मत का कार्य करने वाले यासीन बताते हैं कि अब शाम तक सौ रुपये का काम नहीं होता। इस वजह से दुकान में सब्जी व फल का कारोबार शुरू कर दिया है।
तनवीत सिंह, साइकिल व्यापारी। संवाद
तनवीत सिंह, साइकिल व्यापारी। संवाद
तनवीत सिंह, साइकिल व्यापारी। संवाद
तनवीत सिंह, साइकिल व्यापारी। संवाद
तनवीत सिंह, साइकिल व्यापारी। संवाद