शाहजहांपुर। असुरक्षित यौन संबंध से एड्स के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। जांच का दायरा बढ़ने से गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष करीब दोगुने मरीज नवंबर तक सामने आ चुके हैं। इस वर्ष एचआईवी के 131 नए मरीज सामने आए हैं। जबकि पिछले वर्ष 64 मरीज थे।
एड्स (एक्वायर्ड इम्यून डेफिशियंसी सिंड्रोम) का अब तक इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। इससे बचाव ही इसका इलाज है। यह एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियंसी वायरस) से संक्रमित होने पर फैलता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में एचआईवी संक्रमण के संदिग्ध मरीज को इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) में भेजा जाता है। यहां पर उसकी जांच के साथ ही काउंसलिंग की जाती है। जांच में मरीज पॉजिटिव मिलने पर उसके पार्टनर की भी जांच की जाती है। इसके बाद बरेली में बने एआरटी सेंटर से लिंक कर उसका इलाज शुरू किया जाता है। एचआईवी फैलने के पीछे सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध हैं। अधिकतर मरीजों की काउंसलिंग में सामने आता है कि उन्होंने एक से ज्यादा पार्टनर से संबंध रखा या फिर मौजमस्ती के लिए असुरक्षित यौन संबंध बनाए। 80 प्रतिशत मामलों में यही वजह सामने आती है।
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जांच कराने से पता चलती बीमारी
-ऐसे कई मामले सामने आते हैं जिनमें लक्षण प्रकट नहीं होते। कुछ ऐसे मामले आए जिसमें सड़क हादसे में घायल होने के बाद अस्पताल लाया गया और रक्त की जांच में एचआईवी पॉजिटिव मिले। गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच अनिवार्य कर दी गई है। इस वजह से कई गर्भवती महिलाओं के एचआईवी ग्रस्त होने के केस सामने आए। 2021 में चार, 2022 में दो, 2023 में सात, 2024 में आठ और 2025 में नौ गर्भवती महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव मिलीं।
केस स्टडी-1
-पंजाब में रहने वाले एक 60 वर्षीय व्यक्ति कुछ समय पहले पुवायां में आकर बस गए थे। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर उन्होंने जांच कराई तो वह एचआईवी पॉजिटिव मिले। जांच कराने पर पत्नी भी पॉजिटिव निकलीं। दोनों का इलाज चल रहा है।
केस स्टडी-2
-25 वर्षीय एक युवक टेक्निकल डिग्री के लिए नोयडा में पढ़ाई करने गया था। लौटकर आने के बाद स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होने पर जांच कराई। जांच में एचआईवी पॉजिटिव आया। उसका भी इलाज चल रहा है।
पांच वर्षों के आंकड़े
वर्ष- मरीज
2021-38
2022-35
2023-53
2024-64
2025-131
एचआईवी के कारण
-एचआईवी संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध।
-संक्रमित व्यक्ति के इस्तेमाल किए सिरिंज का प्रयोग करना।
-एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति के अंग प्रत्यारोपण से।
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ये है सावधानी
-अपने जीवन साथी के अतिरिक्त किसी अन्य से यौन संबंध नहीं बनाएं।
- यौन संपर्क के दौरान सुरक्षा उपाय अपनाना।
-रक्त की जरूरत पड़ने पर रजिस्टर्ड ब्लड बैंक से ही रक्त लें।
-दूसरे व्यक्ति का प्रयोग किया ब्लेड आदि का इस्तेमाल नहीं करें।
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-एचआईवी से बचाव ही इसका इलाज है। असुरक्षित यौन संबंध एचआईवी फैलने का बड़ा कारण है। हालांकि बीमारी होने के बाद भी मरीज अगर नियमित रूप से दवाई ले तो वह स्वस्थ जीवन बिता सकता है। जांच के बाद बीमारी की पुष्टि होने पर दवा लेना जरूर शुरू करें।
डॉ. मनीष कुमार, नोडल अधिकारी, आईसीटीसी