ब्लाक में इंदिरा आवासों और शौचालयों के आवंटन और निर्माण में धांधली की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनने के बाद दलालों और अपात्रों में हड़कंप मच गया है। ग्राम पंचायत सचिवों ने अपात्रों के आवास प्रस्तावों को ही फर्जी करार देकर खुद को बचाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में दलालों ने दर्जनों अपात्रों को 70-70 हजार की लागत से बनने वाले इंदिरा आवास आवंटित करवाकर कागजों पर निर्माण करवा दिया है। यही हाल 10-10 हजार रुपये की लागत से बनने वाले शौचालयोें के निर्माण में दलालों ने किया है। ऐसे लोगों के यहां भी कागजों पर शौचालयों का निर्माण करवा दिया गया है। इनके यहां पहले से ही जलप्रवाहित शौचालय बने हुए हैं।
ग्राम पंचायत अस्तोली में तो बिना बीपीएल आईडी के कई लोगों को दो-दो बार इंदिरा आवास आवंटित कर दिए जाने की शिकायतें सीडीओ तक पहुंच चुकीं हैं। सीडीओ के निर्देश पर बीडीओ अनुज कुमार सक्सेना की जांच में लाखों के गड़बड़ घोटाले की पुष्टि भी हो गई है। फिर भी किसी सेक्रेटरी या दलाल के विरुद्ध आरोप तय नहीं किए जा सके हैं। चूंकि आवास और शौचालयों के गोरखधंधे में असरदार लोगों के साथ ही जिले के विभागीय अफसर भी संलिप्त हैं। इससे लाखों के सरकारी धन के दुरुपयोग के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में है।
हालांकि दलालों को 15 से 20 हजार रुपये देकर इंदिरा आवास लेने वाले गरीबों के होश फाख्ता हैं। बीडीओ की जांच में ग्राम पंचायतों के सेक्रेटरी अपात्रों के आवास प्रस्तावों पर अपने हस्ताक्षर न होने की बात कहकर प्रस्तावों को ही फर्जी करार दे रहे हैं। अब सवाल उठता है कि आवास की दूसरी किस्त आहरण करवाने के लिए सेक्रेटरी,जेई,एडीओ पंचायत के साथ ही बीडीओ को लिंटर तक दीवारें बन जाने के प्रमाण पत्र और निर्माणाधीन आवास का फोटो सबकुछ फर्जी हैं? यदि सबकुछ फर्जी है तो संबंधितों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाकर दंडित किए जाने के साथ ही सरकारी धन की वसूली की जानी चाहिए।