शाहजहांपुर। ऑनलाइन भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की चर्चा से व्यापारियों में नाराजगी है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अतिरिक्त शुल्क लगाने से कारोबार पर आर्थिक बोझ बढ़ने से व्यापारी खफा है। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि ऑनलाइन भुगतान पर शुल्क लागू किया गया तो व्यापारी दुकानों से बार कोड हटाकर नकदी लेनदेन को बढ़ावा देने पर विचार करेंगे।
व्यापारियों के अनुसार, सरकार की ओर से व्यापारियों से ही ऑनलाइन भुगतान पर शुल्क लेने की बात कही जा रही है। ग्राहक से डिजिटल माध्यम से भुगतान लेने के बाद उस पर शुल्क का भार व्यापारी पर पड़ने से व्यापारियों का नुकसान होगा। पहले ही कारोबार में कई तरह के खर्च बढ़ चुके हैं। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क का बोझ उठाना व्यापारियों के लिए मुश्किल होगा।
ऑनलाइन भुगतान पर शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब तक जो चर्चा चल रही है। वह सामने आने पर व्यापारी का नुकसान होगा। व्यापारी ऑनलाइन भुगतान नहीं लेगा। बार कोड को हटा देंगे। फिर नकदी लेने के बाद ही व्यापार किया जाएगा।
-तिलक राज भोला-सराफा व्यापारी
वर्तमान में 90 फीसदी लोग ऑनलाइन भुगतान करते हैं। सरकार व्यापारी से शुल्क लेना प्रारंभ करेगी तो डिजिटल की तरफ से हाथ खींचना पड़ेगा। व्यापारी भी नकदी की ओर बढ़ेगा। दुकानदार लाभ के बजाय अपना नुकसान बिल्कुल नहीं करेगा।
-अमित शर्मा, व्यापारी
हमारा टायरों का कारोबार है। अधिकतर लोग ऑनलाइन ही भुगतान करते हैं। कुछ प्रतिशत के लाभ पर कार्य होता है। यदि ऑनलाइन भुगतान पर शुल्क देना पड़ेगा तो नुकसान व्यापारी का होगा। ऐसे में बार कोड को हटाकर नकद धनराशि लेंगे।
-सुरेंद्र सेठी, व्यापारी
ऑनलाइन भुगतान पर शुल्क को दुकानदार कतई स्वीकार नहीं करेगा। इससे ग्राहक को उलझन होगी। विकल्प नकदी का है, या फिर भुगतान के साथ देने वाला शुल्क भी ग्राहक ही व्यापारी को दें, तभी ऑनलाइन भुगतान को स्वीकार करेंगे।
-लविश होरा, व्यापारी
यूपीआई में शुल्क लगने से बड़े उद्योगों पर असर नहीं होगा लेकिन छोटे व्यापारियों और उद्योग संचालकों के सामने दिक्कत खड़ी होगी। शुल्क लगने पर अंत में बोझ आम व्यक्ति पर ही बढ़ेगा। सरकार शुल्क लेती है लेकिन उसका वास्तविक लाभ सभी वर्गाें को नहीं मिलता है।
-अशोक अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष आईआईए
अशोक अग्रवाल।
अशोक अग्रवाल।
अशोक अग्रवाल।
अशोक अग्रवाल।