फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

...मैं मुस्लिम हूं मगर ये सोच करके चली आई, प्रभु श्रीराम दुनिया में सभी से प्यार करते हैं

विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। ओसीएफ इस्टेट श्री रामलीला एवं प्रदर्शनी की ओर से शनिवार रात को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। समारोह के दौरान रात तीन बजे तक श्रोता रचनाओं की फुहारों में भीगते रहे। कवियों ने अपनी पंक्तियों से वाहवाही लूटी। वहीं शायरों का जादू भी खूब चला।
विज्ञापन

रात आठ बजे अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरे का आगाज मंच की वरिष्ठ कवयित्री डॉ. मंजू दीक्षित (आगरा) ने मां शारदे की वंदना से किया। उन्होंने नारी शक्ति पर कुछ यूं अपनी बात रखीं-
समझो न इसे अबला है लाचार है औरत,
अपने पे उतर आए तो तलवार है औरत,
अध्यक्षता करते हुए मशहूर शायर ताहिर फराज ने कुछ यूं समा बांधा -
गम देके वो पूछे है कोई गम तो नहीं है।
जन्नत का जो नशा मुझे दिखलाया गया था।
कानपुर से आए लाफ्टर चैंपियन के सेमी फाइनलिस्ट हेमंत पांडेय ने गुदगुदाया-
एक फूल तुझे देने के लिए सस्ते में जो लिया।
देखे न कोई इसलिए बस्ते में ले लिया।
अमरोहा से आईं निकहत अमरोही ने सुनाया-
मेरे सब गीत गजलें प्रेम की बौछार करते हैं।
तमन्नाओं के गुलशन को, गुले गुलजार करते हैं।
मैं मुस्लिम हूं मगर ये सोच करके मैं चली आई,
प्रभु श्रीराम दुनिया में सभी से प्यार करते हैं।
एटा से आईं कवियत्री समीक्षा सिंह जादौन ने अपनी बात कुछ यूं कही-
विपदाओं से हार नहीं मानी जिसने,
संत्रासों का भी उपहास उड़ाया है।
सिवान, बिहार से आए शायर मीसम गोपालपुरी ने कहा -
जो राज दिल पे है ढोना बहुत जरूरी है।
तुम्हारी याद में रोना बहुत जरूरी है।
मुंबई से आए युवा गीतकार चंदन राय ने सुनाया -
प्यार की बात तो करो पहले।
इक मुलाकात तो करों पहले।
मेरठ से वीररस के कवि डॉ. सौरभ जैन सुमन ने खूब तालियां बटोरी-
यूं शेरों की मांद में आकर डर फैलाने की
गीदड़ की औकात कहां थी आंख दिखाने की।
संचालन करते हुए कवि डॉ. सर्वेश अस्थाना ने कहा कि
किसी गिरगिट से नेता की तुलना करना महापाप है,
क्योंकि रंग बदलने के मामले में नेता गिरगिट का बाप है।
डॉ. पॉपुलर मेरठी, दिल्ली से आए वरिष्ठ शायर इकबाल अशहर ने भी कविता पाठ किया। मुख्य अतिथि महाप्रबंधक वी मतिवाणन व दीपशिखा महिला कल्याण समिति की कार्यवाहक अध्यक्ष मीरा वर्मा ने दीप जलाकर किया। इस मौके पर कार्य प्रबंधक हितेश अग्रवाल, मीरा वर्मा, प्रीति अग्रवाल आदि मौजूद रही।
विज्ञापन

...जब कवियत्री ने लगवाए नारे, कवियों ने हल्का किया माहौल
समारोह के दौरान एटा से आईं समीक्षा सिंह ने काव्यपाठ के दौरान नारे लगवाने शुरू कर दिए। हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक कवि सम्मेलन में नारे लगवाए जाने पर कुछ लोगों ने एतराज जताया। इसके बाद मंच संचालक डॉ. सर्वेश अस्थाना और पापुलर मेरठी ने माहौल को हल्का करते हुए रचनाएं सुनाईं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें