अब तक कर रहे पानी का इंतजार
आजादी के बाद देश में संविधान लागू होने के 65 साल बीतने के बाद आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी पानी और सफाई की सुविधाओं से वंचित है। करीब 31.37 वर्ग किलोमीटर में करीब चार लाख की आबादी वाले इस जिले के गांवों और कस्बों से लेकर शहरी क्षेत्र में स्थिति कमोवेश एक जैसी है।
शहर में ट्रेंचिंग ग्राउंड न होने की वजह से तमाम स्थानों पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। ट्यूबवेल कम होने से शहर में दिन में मात्र चार से पांच घंटे ही वाटर सप्लाई हो पाती है, जबकि बाकी के 19 घंटों तक लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ता है। वर्ष 2011 में हुई जनगणना के अनुसार शहर की आबादी तीन लाख 27 हजार 965 थी। इस हिसाब से 910 सफाईकर्मियों की जरूरत है, लेकिन सफाईकर्मियों की संख्या केवल 582 है।
शहर के मोहल्लों में पाइपलाइन ही नहीं
शहर के लोधीपुर, हयातपुरा और अजीजगंज मोहल्लों में अभी तक वाटर पाइप लाइन ही नहीं बिछाई जा सकी है। इससे यहां के बाशिंदों के इंडिया मार्का हैंडपंप के पानी के सहारे हैं। इसमें कुछ हैंडपंपों से तो दूषित पानी निकलता है। इन मोहल्लों में नगर पालिका परिषद ने वाटर टैक्स वसूलना भी बंद कर दिया है। यही नहीं, शहर में 43 ट्यूबवेल की जरूरत के मुकाबले अब तक 19 ट्यूबवेल हैं।
जलालाबाद में कर्मियों की कमी बनीं सफाई में रोड़ा
जलालाबाद। कस्बे में करीब 45 हजार लोग रहते हैं। नगर पालिका में 17 संविदा कर्मियों सहित कुल 49 सफाई कर्मीं हैं, जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से करीब 100 कर्मियों की जरूरत है। इससे कई वार्डों का सफाई कार्य प्रभावित रहता है।
अपर्याप्त हैं पेयजल के साधन
तिलहर। एक लाख की आबादी वाले इस नगर में पेयजल के लिए एक लाख गैलन क्षमता का वाटर ओवरहेड टैंक नाकाफी साबित हो रहा है। इस वजह से अधिक क्षमता वाले दूसरे ओवरहेड टैंक की जरूरत लोगों को भी महसूस होने लगी है।