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गरीबों के सरकारी घरों पर अमीरों की नजर

Sun, 11 Jan 2015 12:00 AM IST
शाहजहांपुर
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केंद्र की इंदिरा और सूबे की सरकार की लोहिया के नाम पर चल रही आवास योजनाओं के मकान में दबंग और प्रधान के चहेते काबिज होने की जुगत में हैं। पात्रता सूचियां जारी होने के बाद चयन में धांधली की शिकायतें एकाएक बढ़ गई हैं। जिले के कई माननीयों का प्रधानों को संरक्षण मिला होने से ऐसे मामलों में जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जा रही है।
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गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को आवास समेत अन्य योजनाओं का लाभ देने के लिए केंद्र सरकार ने बीपीएल परिवारों की आईडी तैयार कराई थी। यह बीपीएल आईडी लिस्ट वर्ष 2002 में लॉक की जा चुकी है। ऐसा इसलिए किया गया कि कोई भी व्यक्ति सरकारी योजनाओं का अवैध तरीके से लाभ नहीं ले सके। ग्राम प्रधानों पर इसी बीपीएल आईडी से लाभार्थियों के नाम तय करने की बाध्यता लागू की गई।
इस व्यवस्था के चलते ग्राम पंचायतों की बैठक में उन्हीं लाभार्थियों के आवास प्रस्ताव स्वीकृत करने हैं, जिनके नाम बीपीएल आईडी में दर्ज हैं। करीब 12 साल पहले लॉक हुई बीपीएल आईडी में शामिल तमाम परिवारों ने निजी संसाधनों से एक-दो कमरे वाले मकान बना लिए। चूंकि, शासन की गाइड लाइन में बीपीएल आईडी से प्राथमिकता तय करने को कोई दिशा निर्देश नहीं हैं। इसलिए ग्राम प्रधान इसी कमी की आड़ लेकर पक्के मकानों में रहकर खेती करने वालों के नाम भी आवास सूची में शामिल कर रहे हैं।
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इस साल बनेंगे दस हजार से अधिक आवास
चालू वित्त वर्ष में 9954 इंदिरा आवास बनाए जाने हैं। सभी लाभार्थियों को पहली किश्त के 35 हजार रुपये भेज दिए गए हैं। दूसरी किश्त मिलने में देरी होने से शेष 35 हजार रुपये का भुगतान बमुश्किल 500 लाभार्थियों को हो सका है। इसी तरह लगभग पांच सौ लोहिया आवास बनने हैं। खास यह है कि ग्रामीणों की शिकायतोें को अनदेखा करके अपात्र बताए जा रहे लाभार्थियों को भी स्वीकृत धनराशि जारी कर दी गई। ददरौल ब्लॉक के इटौरा गांव में यही हुआ। वहां धनराशि जारी होने के बाद जांच शुरू हुई।

उदयपुर भूड़ा में जांच अधिकारी को किया गुमराह
जलालाबाद क्षेत्र के गांव उदयपुर भूड़ा में आवास आवंटन संबंधी शिकायतों की सत्यता परखने के लिए जांच करने गए डीआरडीए के एक अधिकारी को वहां के दबंगोें ने गुमराह कर फर्जी नामों वाले लाभार्थियों को पूछताछ के लिए आगे कर दिया। उसी दिन एक घंटे बाद दूसरे रास्ते से दोबारा गांव जाकर जांच की तो कई लाभार्थियों के मकान बने मिलने पर वे अपात्र साबित हो गए। इस प्रकरण में संबंधितों से रिकवरी भी की गई।

नेवाजपुर के अपात्रों से होगी धन वसूली
‘ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर बीडीओ का अनुमोदन मिलने के बाद ही आवास स्वीकृत हो रहे हैं। संदेह होने पर लाभार्थियों के नामों का बीपीएल आईडी से भी मिलान करता हूं। यह देखना प्रधानों की जिम्मेदारी है कि बीपीएल आईडी में शामिल कितने लोग अपने मकान बना चुके हैं। खुटार क्षेत्र नेवाजपुर गांव में अपात्रों से तीन लाख रुपये की रिकवरी कराई जा रही है।’
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- चंद्रशेखर शुक्ला, परियोजना निदेशक, डीआरडीए
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