होली का त्योहार आते ही बाजार में तमाम तरह के खाद्य पदार्थ और रंग आ गए हैं। इस समय मिलावटखोर भी धंधा चमकाने के सक्रिय हो गए हैं। इससे बाजारों में तमाम तरह की मिलावट वाली वस्तुएं मौजूद हैं। इन्हें खाकर अक्सर लोग बीमार हो जाते हैं। वहीं केमिकल युक्त रंगों को लगाकर अक्सर लोगों की त्वचा (स्किन) खराब हो जाती है।
होली पर मेवाएं, रवा, मैदा, चीनी, रिफायंड, घी, तेल, चावल, आलू आदि तमाम वस्तुओं से बने खाद्य पदार्थों से बाजार भरा पड़ा है। होली पर एक साथ काफी माल की खपत होने की वजह से मिलावट की जाती है। साथ ही पहले से माल का स्टॉक किया जाता है। इससे कई बार माल खराब हो जाता है। वहीं मिलावट वाली वस्तुएं भी आसानी से बिक जाती हैं। इन्हें खाकर लोग बीमार हो जाते हैं। वहीं तमाम तरीके के केमिकल प्रयोग करके बनाए जाने वाले और पानी वाले हरे एवं लाल रंग बाजारों में मौजूद हैं। शुद्ध रंग महंगे होने की वजह से उनमें मिलावट करके रंगों की बिक्री की जाती है। सस्ते के चक्कर में गुलाल में भी मिलावट शुरू हो गई है। बाजार में रंगों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगना शुरू हो गई। इसमें से तमाम रंग में मिलावट की जाती है। मिलावटी खाद्य पदार्थों और रंगों का प्रयोग करने से क्या लोगों को क्या परेशानियां हो सकती हैं। इस संबंध में विशेषज्ञों की सलाह।
मिलावटी वस्तुओं से खुद को बचाकर रहे स्वस्थ
शहर के जाने माने फिजीशियन डॉ. राजीव सिंह बताते हैं कि मिलावटी वस्तुओं के प्रयोग से लोगों के किडनी, लीवर, नसों से संबंधित तमाम बीमारियां हो जाती हैं। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर के मरीज खान-पान में खास सावधानियां बरतें। इसके साथ ही पेट खराब, फूड प्वाइजिनंग, उल्टी आदि बीमारियां तो तमाम लोगाें को हो जाती हैं। कहते हैं कि इससे बचने के लिए बाजार में ब्रांडेड और एक्सपायरी डेट देखकर ही माल खरीदे और खाएं। जिससे कि त्योहार में स्वस्थ रहा जा सके।
हर्बल रंगों का करें प्रयोग
जिले के प्रख्यात स्किन रोग विशेषज्ञ केजी गंगवार की सलाह है कि केवल हर्बल रंगों से ही होली खेलें। गहरे रंगों जैसे हरा और लाल रंग का प्रयोग न करें। साथ ही गीले रंगों का प्रयोग भी न करें। बताते हैं कि यदि रंग लगाने पर जलन होती है तो तुरंत उसे साबुन से धो दें और मेडिसिन लें। ऐसा न करने पर स्किन पर दाने पड़ जाते हैं, जिनमें तेज खुजली होती है। इससे दर्द होता है और उसका फैलाव शरीर के अन्य भागों में हो जाता है।