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सुनासिर नाथ : यहां भगवान इंद्र ने की थी शिवलिंग की स्थापना

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इसी कुंड के अंदर हैं शिव परिवार की प्रतिमाएं - फोटो : POWAYAN
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हरिओम त्रिवेदी
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पुवायां (शाहजहांपुर)। बंडा से छह किमी दूर खुटार रोड से डुडवा फार्म जाने वाले रास्ते पर सुनासिरनाथ मंदिर है। मान्यता है कि यहां श्रद्धालुओें की मनोकामना पूरी होती है। शिवरात्रि के पर्व पर बंडा से सुनासिरनाथ तक विशाल शिवबरात निकाली जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान इंद्र ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। कहा जाता है कि मुगल शासक ने यहां मूर्ति उखड़वाने की कोशिश की थी। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिवभक्तों की भीड़ के कारण व्यवस्था बनाने को पुलिस तक तैनात करनी पड़ती है।
मंदिर के पुजारी रमेश गिरि ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या पर आसक्त होकर इंद्र ने ऋषि पत्नी से छल किया था। तब क्रोधित ऋषि ने अहिल्या को पत्थर की शिला हो जाने श्राप दे दिया था। ऋषि ने इंद्र को भी श्राप दे दिया था। मान्यता है कि इंद्र ने इसी स्थान पर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न कर श्राप से मुक्ति को प्रार्थना की थी। तब भगवान शिव ने इंद्र को गोमती नदी के किनारे 101 स्थानों पर शिवलिंग स्थापित करने को कहा था। इससे उन्हें श्राप से मुक्ति मिल सके। बताते हैं कि इंद्र ने जिस स्थान पर भगवान शंकर को प्रसन्न किया, वहां पर उन्होंने भगवान शंकर, उनके बाईं तरफ माता पार्वती और उनकी गोद में बालरूप में भगवान गणेश जी की संयुक्त मूर्ति भी स्थापित की थी।
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हाथी तक नहीं उखाड़ सके थे प्रतिमा
बताया जाता है कि किसी मुगल शासक ने यह मंदिर तुड़वा दिया था और मूर्ति उखड़वाने की कोशिश की। किवदंती है कि हाथियों तक से जोर लगवाने के बाद भी मूर्ति टस से मस नहीं हो सकीं। तब मुगल शासक ने स्थान को अपवित्र करने के लिए यहां संरक्षित पशु का वध कराया था। उसी समय यह मूर्ति यहां से स्वत: उखड़ कर लगभग एक किमी दूर गोमती नदी के बीचोबीच धार में जाकर रुक गई। गोमती नदी भी अपनी धार बदलकर पास से बहने लगी। तब से दोनों स्थानों पर भगवान शंकर की सुनासिरनाथ नाम से पूजा की जाती है। मूर्ति के रुकने की जगह काठ का कुंड बनाकर पूजा-अर्चना की जाने लगी।
कभी खाली नहीं होता धूना
स्थान पर पुराना धूना तथा गद्दी स्थल ककइया ईंटों से निर्मित है। श्रद्धालु कुंड में फल, फूल, बेलपत्र और अन्य पूजा सामग्री चढ़ाते हैं। धूना स्थल से स्वत: ही भभूत निकलती है और यह कभी खाली नहीं होता। यहां रोजाना ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। मनौती पूरी होने पर यहां कद्दू चढ़ाया जाता है।
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संत गौरीशंकर सीताराम ने की थी तपस्या
वर्ष 1948 में बंडा के सुनासिर नाथ स्थान पर आए स्वामी गौरीशंकर सीताराम ने बंडा में शिवमंदिर का निर्माण कराकर भगवान शिव पार्वती की प्रतिमा की स्थापना की थी। सुनासिरनाथ इंटर कॉलेज का भी निर्माण कार्य कराया था। उन्होंने वर्षों तक गोमती नदी में खड़े होकर कठोर तप किया। तप के दौरान मछलियां उनके पैरों का मांस तक खा गई थीं। 2003 में वह ब्रह्मलीन हो गए।

जलमग्न शिव, पार्वती, गणेश की पूजा करते श्रद्घालू- फोटो : POWAYAN

 

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