शाहजहांपुर। विकास खंड सिंधौली की ग्राम पंचायत तेरा में वित्त वर्ष 2021-22 में लाइट लगाने में हुए घोटाले की फिर से जांच होगी। सीडीओ श्याम बहादुर सिंह ने मामले में शिकायत के आधार पर पहले हुई जांच में कई खामियों को देखते जिला पंचायत राज अधिकारी को दोबारा जांच कराने के निर्देश दिए। साथ ही विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता और जिला विकास अधिकारी की दो सदस्यीय कमेटी गठित करके दो दिन में जांच आख्या तलब की है।
ये है मामला
हिंदू युवा वाहिनी के जिला उपाध्यक्ष राजन कुमार सिंह ने गत जनवरी में डीएम से शिकायत की थी कि तेरा ग्राम पंचायत में प्रकाश व्यवस्था के लिए एलईडी लगाने का ठेका ऐसी कंपनी को दिया गया जो सीमेंट बेचने को अधिकृत है। इस कारण लाइट लगाने में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। मामले की जांच के लिए सिंधौली के तत्कालीन बीडीओ संजीव कुमार ने एडीओ (पंचायत) आदिल सक्सेना, एडीओ (आईएसबी) अनूप कुमार और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता शिव कुमार वर्मा की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने जांच करके 23 मार्च को बीडीओ को सौंपी रिपोर्ट में एलईडी की स्थापना में तमाम घपलों का उल्लेख किया था।
सीडीओ ने इसलिए खारिज की पहली जांच
जांच कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि नियमानुसार 45 वाट की एलईडी कम से कम 75 मीटर दूर लगनी चाहिए, लेकिन इस मानक का पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि लाइट मानक से कम दूरी पर लगाई गईं अथवा उनकी दूरी ज्यादा रखी गई। एलईडी की गुणवत्ता पर संदेह करते हुए यह भी कहा गया कि ऐसा प्रतीत होता है कि उसके कलपुर्जे स्थानीय स्तर पर जोड़कर असेंबल किए और ऊपर से कंपनी का लोगो स्टीकर चस्पा किया गया। सीडीओ ने जांच के निष्कर्ष में प्रतीत शब्द पर आपत्ति करते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि लाइट ब्रांडेड कंपनी की लगी है अथवा नहीं। यह पता लगाने के लिए सीडीओ ने डीपीआरओ घनश्याम सागर को उस कंपनी के अधिकृत डीलर से एलईडी लाइट का सैंपल लेकर उसका गांव में लगाई गई लाइटों से मिलान कराने के निर्देश दिए।
पहले हुई जांच में कई बिंदु स्पष्ट नहीं हैं। हालांकि, रिपोर्ट में अन्य कई अनियमितताओं का उल्लेख किया है और इसीलिए डीपीआरओ को दोबारा प्रशासनिक जांच कराने के लिए जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ी तो लाइट का ठेका लेने वाली कंपनी इलमा इंटरप्राइजेज द्वारा ब्लॉक के अन्य 33 गांवों में लगाई गई लाइट की जांच भी कराई जाएगी। अंतिम जांच में दोषी पाए गए लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और उनसे सरकारी धन की वसूली कराई जाएगी। -श्याम बहादुर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी