धर्मगुरु भी कुपोषण मिटाने में सहयोग दें
जिले में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 14 हजार मिली है। इस पर गंभीर संज्ञान लेते हुए मंगलवार को विकास भवन सभागार में डीएम पुष्पा सिंह ने जिले भर के धर्म प्रमुखों, वरिष्ठ नागरिकों और प्रभावशाली लोगों की बैठक बुलाई। कहा कि जिस तरह पोलियों के उन्मूलन में सभी ने सहयोग देते हुए पोलियो का जड़ से उन्मूलन कर दिया है, उसी तरह कुपोषण को जड़ से मिटाने के लिए सबका सहयोग अपेक्षित है। उनसे अपील की कि वे ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (हर माह के बुधवार व शनिवार) पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर शामिल हों। इसके लिए मस्जिद - मंदिर से एलान कराते हुए लोगों को बतायें। कुपोषण की रोकथाम और मां द्वारा जन्म के समय से लेकर छह माह तक स्तनपान के विषय में संदेश के दौरान इमाम साहब द्वारा जरूर बताया जाए। मदरसों और स्कूलों में पढ़ने वाले लड़के - लड़कियों के द्वारा कुपोषण की रोकथाम के संदेशों को घरों तक पहुंचाने के लिए मदद करें। इसमें कोई शंका या भ्रम की स्थिति हो तो लोगों को सही जानकारी अवश्य दें। डीएम ने कहा कि बच्चे सबके प्यारे होते है और यदि बच्चा कुपोषित हो जाता है तो वह शारीरिक एवं मानसिक रूप से कमजोर हो जाता हैं। ऐसी स्थिति में उसका विकास अवरुद्ध हो जाता है। उसी तरह पूरा आहार न मिलने पर गर्भवती महिलायें भी एनीमिया (खून की कमी) की शिकार हो जाती है। किशोरी लड़कियों का यदि सही खान-पान न रहा तो वह भी एनीमिया का शिकार हो जाती हैं। उक्त तीनों श्रेणी के बच्चे व महिलाएं समाज की संरचना की रीढ़ होते हैं। इस लिए सभी का नैतिक दायित्व है कि इस कमी को दूर करने में पूरा सहयोग दें। बैठक में सीडीओ पुलकित खरे, सीएमओ डॉ. कमल कुमार, मोहम्मद अनीस रजा खां, डीआईओ डॉ. लक्ष्मण सिंह और यूनीसेफ के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।