मानस कथा मर्मज्ञ संजीवनी मिश्रा ने कहा कि कलियुग में रामकथा उस औषधि की तरह है जो दैहिक, दैविक और भौतिक, तीनों प्रकार के ताप नष्ट कर देती है।
गांव मोहनपुर के विश्व शक्ति दुर्गा ज्ञानपीठ आश्रम में संत योगेश्वर महाराज के नेतृत्व में चल रहे यज्ञ और रामकथा में शनिवार को संजीवनी मिश्रा ने श्रोताओं को प्रभु भक्ति की महिमा सुनाते हुए कहा कि कलियुग केवल नाम अधारा... सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा। अर्थात कलियुग में केवल राम का नाम सुमिरन करने मात्र से मनुष्य का उद्धार हो जाता है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहकर लोगों की ज्यादा सेवा की जा सकती है। इस आश्रम में मनुष्य को तमाम बाधाएं श्रीराम की भक्ति से विमुख रखने का प्रयत्न करती हैं, लेकिन मानव को ईश्वर भक्ति के लिए समय अवश्य निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान भक्त को उसी प्रकार प्रेम करते हैं जिस प्रकार एक माता अपने शिशु को प्रेम करती है। उन्होंने राम नाम की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि वाल्मीकि मुनि राम नाम का उल्टा जाप करते रहने से महामुनि की पदवी प्राप्त होकर भवसागर को पार कर गए। 19 जुलाई को पूर्णाहुति और भंडारे का कार्यक्रम होगा।