निगोही (शाहजहांपुर)। तेज बुखार ने बलेली गांव में ननद-भाभी की जान ले ली। ननद की बृहस्पतिवार शाम पांच बजे मौत हो गई, वहीं भाभी ने रात 1:30 दम तोड़ दिया। घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
निगोही क्षेत्र के गांव बलेली निवासी सियाराम की पत्नी 40 वर्षीय नन्ही को चार सितंबर को सुबह पांच बजे ठंड लगकर बुखार आया। उसने गांव के ही झोलाछाप से दवा ली। बुखार का असर कम नहीं होने पर उसने दोबारा झोलाछाप से दवा ली। अगले दिन पांच सितंबर की शाम पांच बजे नन्ही की मृत्यु हो गई। नन्ही अलग मकान बनाकर अपने मायके गांव बलेली में ही रहती थी। मृतक नन्ही की भाभी रामकुमार की 30 वर्षीय पत्नी ममता को नन्ही से पहले से ही एक सितंबर को ठंड लगकर बुखार आ रहा था। उसने पास के ही गांव निवासी झोलाछाप से दवा ली, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं नहीं हुआ। छह सितंबर की रात 1:30 बजे ममता ने भी दम तोड़ दिया। एक परिवार में ननद, भाभी की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। वहीं गांव में सन्नाटा पसर गया। दोनों अर्थियां एक साथ उठीं तो हर किसी की आंखें नम हो गई।
सीएमओ डॉ.आरपी रावत ने बताया कि बलेलीे गांव में ननद-भाभी की बुखार से मौत की जानकारी होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव भेजी है। टीम ने गांव के लोगों को स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवा वितरित की और घर में व घर के आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा।
इसी गांव के रामपाल की 16 वर्षीय पुत्री शिवानी, जसवंत के सात वर्षीय पुत्र रामसरन, गुड्डू के एक वर्षीय पुत्र पिंकू की भी बुखार से एक सप्ताह के अंतराल में मृत्यु हो चुकी है।
इसी गांव के रहने वाले देवेंद्र छह वर्षीय पुत्री सुरभि, आठ वर्षीय गीता,10 वर्षीय प्रांशी, 55 वर्षीय मां फूलमती, 30 खुशीराम व उनकी पत्नी रीना, छह वर्षीय पुत्र रज्जम, सात वर्षीय पुत्र मोनू बुखार से पीड़ित हैं। इसी गांव की सुमन, राजकुमार, मायावती, सियाराम, बाबूराम, छबिनाथ, मिथिलेश, जगदीश, सोनी, अर्पित, राजेंद्र, फिजा सहित गांव के दो सौ लोग बुखार से पीड़ित है। सियाराम ने बताया कि इस गांव में 15 दिन पहले स्वास्थ्य शिविर भी लग चुका है और फांगिंग भी हुई, लेकिन बुखार थम नहीं रहा है।