शाहजहांपुर। मिर्जापुर और परौर क्षेत्र में बाढ़ उतरने के बाद बुखार, त्वचा समेत कई तरह की बीमारियों से लोग जूझ रहे हैं। इन मरीजों को अस्पतालाें में उपचार नहीं मिल पा रहा है। पर्याप्त स्टाफ नहीं हाेने के चलते मरीजों को निजी डॉक्टराें के पास जाना पड़ रहा है।
परौर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतरी हुईं हैं। यहां का अस्पताल खंडहरनुमा हो चुका है, लेकिन तीन कमरों का अस्पताल का बनाकर लोगाें को राहत देने का प्रयास किया गया। भवन की रंगाई-पुताई कराकर बेहतर कर दिया, लेकिन डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी। अतिरिक्त पीएचसी पर डॉक्टर, फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय और चपरासी तक नहीं है।
अस्पताल मात्र एएनएम के सहारे चल रहा है। वह ही आने वाले मरीजों का उपचार करती हैं। किसी बैठक या सरकारी कार्य में ड्यूटी लगने पर अस्पताल बंद करना पड़ जाता है। ऐसे में मरीजों को कलान या मिर्जापुर में स्वास्थ्य इकाई या निजी अस्पताल में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अहम बात यह है कि दो बजे के बाद अस्पताल बंद होने के बाद उपचार की कोई सुविधा नहीं रहती है।
इसी तरह मिर्जापुर की सीएचसी भी स्टाफ की कमी से जूझ रही है। एमओआईसी डॉ.आदेश रस्तोगी के अनुसार, चार डॉक्टर, चार फार्मासिस्ट, दो सफाई कर्मी, एक लैब तकनीशियन, दो वार्ड बॉय, एक एक्स-रे तकनीशियन, एक एआरओ व पांच एएनएम की कमी है। मिर्जापुर का क्षेत्र बड़ा होने के कारण स्टाफ की कमी से दुश्वारी आती है।
कई जगह पर कैंप लगाने के साथ ही अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना मुश्किल होता है। चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि डॉक्टरों की कमी की पूर्ति के लिए कई बार पत्राचार कर चुके हैं।
जलालाबाद में विशेषज्ञों की कमी
जलालाबाद सीएचसी पर चिकित्साधीक्षक डॉ. सोमेश्वर समेत पांच डॉक्टर मौजूद है। इनमें डॉ. गौरव कुमार, एक महिला चिकित्सक शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम में चार डॉक्टर लगाए गए हैं। दो फार्मासिस्ट हैं। चिकित्साधीक्षक ने बताया कि सीएचसी पर डॉक्टर पर्याप्त है लेकिन विशेषज्ञों की कमी है।