खुटार के गांव महोंलिया वीरान की लक्ष्मी देवी की हत्या पर रोते परिजन। संवाद
खुटार। हरिपाल मंगलवार दोपहर से ही लोड तमंचा लेकर घूम रहा था और गांव में कहता घूम रहा था कि आज पत्नी और मंझले बेटे, बहू को मार देगा। लोगों ने उसकी बात को गंभीरता से लेकर पुलिस को सूचना दी होती तो लक्ष्मी देवी की जान बच सकती थी।
हरिपाल के पास ढाई एकड़ जमीन है। तीन वर्ष पूर्व उसने जमीन का बंटवारा कर चार हिस्से पुत्रों को दे दिए थे और एक हिस्सा अपने पास रखा था। बंटवारे के समय ही पत्नी लक्ष्मी देवी पुत्र जंगबहादुर का पक्ष ले रही थीं, जबकि हरिपाल बड़े पुत्र नरोत्तम के पक्ष में था। पत्नी के जंगबहादुर का पक्ष लेने के कारण वह पत्नी से बेहद खफा हो गया था और पत्नी से अलग बड़े पुत्र के साथ रहने लगा था। उसका पत्नी से आए दिन विवाद होता रहता था। हरिपाल के पुत्र पप्पू और नन्हें ने पिता से मिली जमीन के अलावा डेढ़-डेढ़ एकड़ जमीन खरीद भी ली है।
एक वर्ष पूर्व हरिपाल ने चार पुत्रों से जमीन वापस ले ली थी और सारी जमीन बड़े पुत्र नरोत्तम को दे दी थी। उसका पत्नी से विवाद कम नहीं हो रहा था और आए दिन पत्नी से गाली-गलौज करता रहता था। सुबह पत्नी से विवाद के बाद दोपहर से हरिपाल तमंचा लेकर गांव में घूमने लगा और कह रहा था कि आज पत्नी, पुत्र जंगबहादुर और जंगबहादुर की पत्नी को मार देगा। लोगों ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। शाम सवा पांच बजे उसने पत्नी की हत्या कर दी। हरिपाल का पुत्र पप्पू धान की रोपाई करने मध्य प्रदेश गया है और नन्हें अपने साढ़ू की पुत्री की विदा कराने बिलसंडा गए थे।
पत्नी को गोली मारने के बाद कहता रहा हरिपाल, तीन को मारना था, एक को मार पाया
खुटार। गोली चलने की आवाज सुनकर खेतों में काम कर रहे लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो हरिपाल ने तमंचा तानकर गोली मारने की धमकी दी, इस कारण कोई भी पास नहीं गया। इस बीच हरिपाल लगातार कहता रहा कि कि पत्नी, पुत्र और पुत्रवधू को मारना था, लेकिन एक को ही मार पाया, इसका अफसोस है। संवाद