पुवायां में धनपाल की हत्या का आरोपी रामप्रताप। स्रोत पुलिस
पुवायां। धनपाल की हत्या के आरोपी रामप्रताप को शुक्रवार को पुलिस ने कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। रामप्रताप ने बताया कि धनपाल के गाली देने पर उसने पीटने की नीयत से डंडा मार दिया था। हत्या का इरादा नहीं था। धनपाल की मौत से उसे पछतावा है।
हालांकि, साथी कर्मचारियों का कहना है कि रामप्रताप झगड़ालू किस्म का है। उसका धनपाल से विवाद होता रहता था। पुवायां में एक ट्रैक्टर एजेंसी पर गांव नगला जमीने हरना निवासी धनपाल और मूलरूप से गांव गुलौली और वर्तमान में जेबा रोड निवासी रामप्रताप मैकेनिक का काम करते थे। धनपाल ने तीन सितंबर को एक नया ट्रैक्टर सेट किया था, लेकिन किसान से इनाम के दो सौ रुपये रामप्रताप ने ले लिए थे। धनपाल और रामप्रताप के बीच इसको लेकर विवाद हो गया था। रामप्रताप ने धनपाल की नाक पर डंडा मार दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
साथी कर्मचारियों ने बताया कि धनपाल एजेंसी पर लगभग 20 साल से काम कर रहे थे। रामप्रताप आठ वर्ष से काम कर रहा था। दोनों ने एक-डेढ़ वर्ष तक साथ काम किया, लेकिन इसके बाद लेन-देन को लेकर आए दिन विवाद होने पर एजेंसी स्वामी ने दोनों का काम बांट दिया था। इसके बाद भी दोनों में आए दिन विवाद हो जाता था। साथी कर्मचारियों ने कई बार दोनों को बैठाकर विवाद न करने की सलाह दी, लेकिन रामप्रताप का रवैया नहीं बदला। रामप्रताप ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन तीन अक्तूबर को दो ट्रैक्टर बिके थे। एक ट्रैक्टर खरीदने वाले ने इनाम के रूप में दो सौ रुपये दिए थे। इसको लेकर उसके और धनपाल के बीच विवाद हो गया। एजेंसी मालिक ने विवाद शांत करा दिया था, लेकिन धनपाल की बातों से वह बेहद आहत हो गया था। कुछ देर बाद धनपाल एजेंसी से कुछ दूर गोदाम गया तो वह धनपाल को पीटने की नीयत से डंडा लेकर बाइक से गोदाम पहुंचा और धनपाल के एक डंडा मार दिया। डंडा धनपाल की नाक पर लगा और खून बहने लगा। धनपाल के गिरने पर वह मौके से भाग निकला और डंडे को एजेंसी के पास फेंक कर घर चला गया था। उसे नहीं पता था कि धनपाल की मौत हो जाएगी। रामप्रताप बोला, गलत बातें कहां तक सुनता। वह धनपाल को सबक सिखाना चाहता था, लेकिन मारना नहीं चाहता था। थाना प्रभारी हरिपाल सिंह बालियान ने बताया कि रामप्रताप को कोर्ट से जेल भेज दिया गया है। मामले में जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हर माह मिलते थे 30 से 35 हजार रुपये
धनपाल और रामप्रताप को 15-15 हजार रुपये प्रतिमाह ट्रैक्टर कंपनी देती थी। दोनों को 10-10 हजार रुपये एजेंसी स्वामी से मिलते थे और प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये इंसेंटिव कंपनी की ओर से मिल जाता था। इस प्रकार रामप्रताप और धनपाल हर महीने 30 से 35 हजार रुपये कमा लेते थे। मात्र दो सौ रुपये की खातिर रामप्रताप ने धनपाल की हत्या कर दी। दोनों लोगों के परिवार बर्बाद हो गए।