मंगलवार को बारात के स्वागत सत्कार के बाद भगवान सालिगराम के साथ तुलसी का विवाह करा दिया गया। इस दौरान डांडिया नृत्य और मां काली की फूलों की होली ने बारातियों और जनातियों का मन मोह लिया।
माता तुलसी और भगवान सालिगराम के विवाह की तैयारियां कई दिनों से की जा रही थीं। मंगलवार दोपहर बाद कसमभरा मठिया के शिव मंदिर से शुरू हुई भगवान सालिगराम की बारात नगर के कई मार्गों से होती हुई वापस मंदिर जाकर समाप्त हुई। यहां बारात का भव्य स्वागत किया गया और द्वाराचार आदि की रस्में पूरी की गईं। इसके बाद भगवान सालिगराम का माता तुलसी से विवाह संपन्न कराया गया। विवाह के दौरान चंदौसी से आए कलाकारों ने डांडिया नृत्य प्रस्तुत किया। बारात के बाद लंगर का आयोजन किया गया जिसमें नगर सहित देहात क्षेत्र के तमाम गांवों से आए लोगों ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में समिति सदस्यों के अलावा तमाम लोगों का सहयोग रहा।
समिति ने कराई चार कन्याओं की शादी
पुवायां। भगवान सालिगराम और तुलसी के विवाह से पूर्व समिति की ओर से नगर के मोहल्ला हरदयाल कूंचा निवासी आरती की शादी बंडा के गांव जमुनिया के पवन से, इसी मोहल्ले की छाया की शादी लखीमपुर के सीताराम से, बिलसंडा की आरती की शादी पुवायां के दीपक से और बिलसंडा की चांदनी की शादी पुवायां के राजन के साथ संपन्न कराई। समिति की ओर से नव दंपतियों को गृहस्थी का सामान भेंट किया गया।