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Shahjahanpur News: विलय स्कूलों से आधे विद्यार्थियों ने मुंह मोड़ा...शिक्षक भी समस्याओं से घिरे

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निगोही के प्राथमिक विद्यालय ऐंठापुर में पढ़ते बच्चे। संवाद
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शाहजहांपुर। स्कूलों को विलय करने की वजह से विद्यार्थियों की उपस्थिति पर फर्क पड़ा है। जिले में विलय किए गए 109 स्कूलों से आधे से ज्यादा विद्यार्थियों ने मुंह मोड़ लिया है। इन बच्चों ने तो स्कूल जाना छोड़ दिया है, साथ ही निजी विद्यालय में दाखिला करा लिया है। इसके अतिरिक्त शिक्षक भी तमाम तरह की समस्याओं से घिरे हुए हैं, जिनका समाधान करने के बजाय कार्रवाई की चेतावनी मिल रही है।
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जनपद में 2720 स्कूलों में 109 को विलय किया गया है। स्कूल विलय करने में मानकों को दरकिनार करने का असर विद्यार्थियों की संख्या पर पड़ा है। नगर क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय महमंद जंगला में महमंद हद्दफ और तिलहरजई स्कूल एक ही परिसर में संचालित होते थे। विलय में लाला तेली बजरिया के लिबास टेलर के पास संचालित प्राथमिक विद्यालय महमंद जलालनगर को कंपोजिट स्कूल में विलय कर दिया गया।
यहां के 30 बच्चे भी भेज दिए गए। दूरी अधिक होने से मात्र चार से पांच बच्चे ही स्कूल पहुंच रहे हैं। शेष के अभिभावक स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं है। कंपोजिट स्कूल में चार विद्यालय संचालित होने से विद्यार्थियों की संख्या 690 हो गई है। आठ कक्षाओं को चलाने के लिए मात्र छह कमरे हैं।
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ऐसे में आंगन, बरामदे में कुर्सी-मेज व दरी बिछाकर बच्चों को पढ़ाया जाता है। एक बेंच पर तीन के बजाय चार से पांच छात्र-छात्राएं बैठाकर कार्य चलाया जा रहा है। यहां पर पूर्व में तीन शिक्षक थे, अब दो और बढ़ गए हैं। जबकि रसोइयों की संख्या छह हो गई है। एमडीएम वितरण के समय छह सौ विद्यार्थियों को बैठाकर खिलाना भी एक चुनौती है। इसी तरह कंपोजिट स्कूल रोटी गोदाम में प्राथमिक विद्यालय बिजलीपुरा का विलय किया गया है। यहां पंजीकृत 12 में मात्र चार विद्यार्थी पहुंच रहे हैं। शेष का पता नहीं है।

विद्यालय की दूरी बढ़ने से घटी विद्यार्थियों की संख्या
कांट। प्राथमिक स्कूल बिठौली में प्राथमिक स्कूल बिसरा को विलय किया गया है। बिसरा के 17 बच्चों को भिठौली में जाने पर विद्यार्थियों की संख्या 46 हो गई है। विसरा गांव के 17 विद्यार्थियों में मात्र चार से पांच ही स्कूल पहुंच रहे हैं। अभिभावकों ने बताया कि दूसरे गांव में जाने से असुरक्षा का भाव रहता है। इसलिए बच्चों को नहीं भेजा जा रहा। संवाद

38 में मात्र आठ से दस बच्चे पहुंच रहे
कुर्रियाकलां।। कदरदादपुर उर्फ लिल्थरा के मजरा जाटव गौटिया का प्राथमिक विद्यालय उसी के मजरा मढ़हा के प्राथमिक विद्यालय में विलय कर दिया गया है। विलय किए गए स्कूल की विद्यार्थियों की संख्या 38 थी, लेकिन अब केवल आठ से दस ही पहुंच रहे हैं। अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। उनका नामांकन दूसरे स्कूलों में भी नहीं कराया है। संवाद

फोटो 24
60 प्रतिशत बच्चे ही उपस्थित हो रहे
निगोही। नकाटिया प्राथमिक स्कूल के 14 छात्र व 15 छात्राओं को पांच सौ मीटर दूर ग्राम ऐंठापुर प्राथमिक स्कूल में विलय किया गया है। उसमें पहले से ही 54 बच्चे पढ़ रहे थे। दोनों स्कूल एक होने के बाद विद्यार्थियों की संख्या 83 हो गई है। दूरी ज्यादा होने के चलते नकाटिया स्कूल के 60 प्रतिशत बच्चे ही उपस्थित होते हैं। शेष बच्चे नियमित तौर पर नहीं आते हैं। पांच कमरों वाले स्कूल में पहुंचने पर तीन कक्षाओं में ही शिक्षक पढ़ाते मिले। इंचार्ज प्रधानाध्यापक अभिषेक कुमार ने बताया कि वर्षा के दिनों में विद्यालय परिसर कच्चा होने के कारण कीचड़ होने से दिक्कत आती है। संवाद

शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित
तिलहर। मोहल्ला इमली स्थित प्राइमरी और जूनियर स्कूल के एकीकृत होने के बाद अब यह कंपोजिट विद्यालय बन गया है। विद्यालय में वर्तमान में 176 छात्र-छात्राएं हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। प्रधानाध्यापक विशाल गुप्ता, सहायक अध्यापिका पूनम यादव और शिक्षामित्र सन्नो समेत कुल तीन का स्टाफ है। इतने स्टाफ में सभी कक्षाओं का संचालन करना मुश्किल साबित हो रहा है। संवाद

शिक्षक पसोपेश में, स्थिति स्पष्ट नहीं
जिले में विलय किए गए 109 स्कूलों में कार्यरत रहे शिक्षकों काफी पसोपेश में हैं। विलय होने के बाद बच्चे व शिक्षक दूसरे स्कूल में पहुंच गए हैं, लेकिन प्रेरणा पोर्टल पर उनके स्कूल का संचालन हो रहा है। वेतन से लेकर अवकाश तक पुराने स्कूल से मिल रहा है। स्कूल के नाम पर आने वाली धनराशि को खर्च करने को लेकर शिक्षक परेशान हैं। धनराशि को पुराने स्कूल में खर्च करें, जो बंद हो गया, या फिर नए स्कूल में, जहां उनके शत-प्रतिशत बच्चे पढ़ने नहीं आ रहे हैं। बच्चों के नदारद होने से प्रेरणा पोर्टल का ड्राप बॉक्स भी खाली नहीं होने से कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है।

एक किलोमीटर से अधिक दूरी का कोई भी स्कूल विलय नहीं किया गया। विद्यार्थियों की उपस्थिति कम होने की जानकारी बीईओ से नहीं मिली है। शिक्षकों का दायित्व है कि अभिभावकों से वार्ता करें कि वे नियमित रूप से बच्चों को स्कूल भेजें।
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- दिव्या गुप्ता, बीएसए
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