शाहजहांपुर। वन विभाग में जिप्सम खाद की खरीद में अनियमितता के आरोपों की जांच 25 दिन बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। डीएफओ सचिन कुमार ने चार अगस्त को एसडीओ डॉ. सुशील कुमार के नेतृत्व में जांच समिति गठित कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे, लेकिन रिपोर्ट अब तक नहीं सौंपी गई है।
वन विभाग की पांच रेंजों में ऊसर-बंजर भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए पौधरोपण से पहले करीब पांच हजार बोरी जिप्सम खाद मंगाई गई थी। प्रत्येक बोरी पर 50 किलोग्राम वजन अंकित था और इसकी कीमत करीब 600 रुपये बताई गई। इस हिसाब से खाद की खरीद पर करीब 30 लाख रुपये खर्च हुए।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि बोरियों में निर्धारित 50 किलोग्राम के बजाय केवल 10 से 15 किलोग्राम खाद मिली। आरोप है कि दो रेंज में खाद पहुंचाई ही नहीं गई, जबकि अन्य तीन रेंज में पौधरोपण के दो से तीन सप्ताह बाद खाद डाली गई।
एसडीओ ने जांच के दौरान सभी रेंजों का निरीक्षण किया। बताया गया कि उनके पहुंचने से पहले ही खाद की बोरियां हटा दी गईं थीं। बाद में एसडीओ ने वन क्षेत्राधिकारियों को नोटिस जारी कर खाद का प्रयोग देर से किए जाने के संबंध में जवाब मांगा। अधिकारियों ने जवाब दे दिया है, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक डीएफओ को नहीं मिली है।
खाद की टेंडर प्रक्रिया और भुगतान डिवीजन कार्यालय से होने के कारण जांच में देरी पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य वन संरक्षक बरेली मंडल पीपी सिंह ने बताया कि वह बिजनौर में तेंदुए के हमले की घटना की जांच के लिए गए हैं। लौटने के बाद जांच रिपोर्ट तलब कर समीक्षा की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय होगी।