शाहजहांपुर। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े की परतें उधड़ती जा रही हैं। अब हाईस्कूल के फर्जी अंकपत्र के साथ अर्ह शैक्षिक प्रमाण पत्रों के माध्यम से बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पद हासिल करने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय मिर्जापुर के सहायक अध्यापक का मामला पकड़ में आया है। जांच के बाद शिक्षक की सेवा समाप्त कर दी गई है। साथ ही प्राथमिकी दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए।
बीएसए राकेश कुमार ने बताया कि मूलरूप से पीलीभीत के गांव जैतपुर निवासी जानकी प्रसाद ने 21 नवंबर 1997 को मिर्जापुर के प्राथमिक विद्यालय अविचरपुर में कार्यभार ग्रहण किया था। इसके बाद तीन दिसंबर 2001 को उनकी पदोन्नति हो गई और उन्होंने प्राथमिक विद्यालय बहरिया मिर्जापुर में ही प्रधान अध्यापक का पद हथिया लिया। बाद में जानकी प्रसाद ने अपना समायोजन मिलकिया स्कूल में करा लिया। इसी क्रम में उन्होंने दोबारा अपना समायोजन उच्च प्राथमिक विद्यालय मिर्जापुर कराने में सफलता हासिल कर ली।
बीएसए ने बताया कि इसी बीच मिर्जापुर के प्रभुशंकर सिंह नामक व्यक्ति ने जानकी प्रसाद पर फर्जी अंकपत्र के आधार पर नौकरी करने का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत कर दी। इसके बाद शुरू हुई जांच में उनका हाईस्कूल का अंकपत्र फर्जी पाया गया है। विभाग से धोखाधड़ी कर सेवायोजित होने के कारण जानकी प्रसाद की नियुक्ति तिथि से ही सेवाएं खत्म कर दी गई हैं। साथ ही सरकार द्वारा वेतन और भत्ते के रूप में प्राप्त समस्त धनराशि की वसूली भू-राजस्व की भांति कराने का निर्णय लिया गया है। बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारी मिर्जापुर को जानकी प्रसाद के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए अधिकृत कर दिया है।