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ग्रीन जोन: घाटे का सौदा साबित हो रहा रोडवेज बसों का संचालन

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शाहजहांपुर। ग्रीन जोन में शामिल जनपद में 46 दिन बाद बुधवार से जिले के अंदर रोडवेज की बसें चलनी शुरू तो हुई लेकिन पर्याप्त यात्री न मिलने से वह अब घाटे का सबब बन गई हैं। दो दिन में चार प्रमुख मार्गों पर 10 बसें चलाई जा रही हैं लेकिन उनमें यात्रियों की संख्या दहाई तक सीमित है। इनके कमाई की तुलना में बसों का डीजल काफी अधिक फुंक रहा है। ऐसे में रोडवेज प्रशासन को बसों को चलवाने में नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि रोडवेज प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही सबकुछ सामान्य हो जाएगा और यात्रियाें की संख्या में इजाफा होगा।
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कोरोना संक्रमण से मुक्त जनपदों को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को ग्रीन जोन घोषित कर ऐसे जनपदों की सीमा में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं शुरू करने की संस्तुति कर दी थी, लेकिन शासन और परिवहन निगम मुख्यालय से इस बारे मेें कोई आदेश नहीं मिलने के कारण सोमवार तक दुविधा की स्थिति बनी रही। मंगलवार को शासनादेश जारी होने पर डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने जिले के अंदर प्रमुख मार्गों पर रोडवेज बसें चलाने की सशर्त अनुमति दे दी। इस बीच, निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक ने भी गाइडलाइन जारी कर यात्रियों के बीच सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए एक बस में अधिकतम 25 यात्री बिठाने के निर्देश दिए।
रोडवेज के अधिकारियों को उम्मीद थी कि बसें चलने पर लॉकडाउन से उकताए लोग बाहर निकलना शुरू कर देंगे, लेकिन आम आदमी पर कोरोना का खौफ इतना हावी रहा कि बुधवार को पहले दिन यहां से जलालाबाद, अल्हागंज, मिर्जापुर, पुवायां, खुटार, बंडा, तिलहर, कटरा आदि मार्गों की नौ बसों में यात्रियों की संख्या पांच से सात तक सिमटी रही। इन बसों में 15,856 रुपये का डीजल भराया गया, लेकिन डीजल व्यय की तुलना में यात्री भाड़ा एक तिहाई से भी कम मिला। इन सभी मार्गों पर दोहरे चक्कर लगाने पर भी 180 यात्रियों से 6877 रुपये किराया धनराशि मिल सकी।
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हालांकि, रोडवेज डिपो की आमदनी के लिहाज से बीते दिन हालात थोड़े सुधरे, लेकिन आय उम्मीद से कम हुई। बृहस्पतिवार को विभिन्न मार्गों पर भेजी गईं दस बसों में 13,099 रुपये का डीजल भरा गया। ये बसें सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक रनिंग पोजीशन में रहीं। इनमें यात्रियों की संख्या 370 तक पहुंची, लेकिन किराया केवल 15,989 रुपये मिला। क्योंकि तमाम मुसाफिरों ने बीच रास्ते के टिकट कटाए थे। अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानक के अनुरूप यात्रियों की संख्या बढ़ने पर विभाग की आमदनी में भी वृद्धि होगी।
शाहजहांपुर डिपो की आय और व्यय: एक नजर
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दिवस यात्री किराया प्राप्ति डीजल व्यय
बुधवार 180 6,877 रुपये 15,856 रुपये
बृहस्पतिवार 370 18,989 रुपये 13,099 रुपये
लॉकडाउन ने छीनी करोड़ों की कमाई
सामान्य दिनों मेें सभी मार्गों पर बसें चलने से रोडवेज को रोजाना औसतन 30 लाख रुपये तक किराया मद में आमदनी होती है। लॉकडाउन में 46 दिन तक स्थानीय डिपो की सभी 124 बसों के चक्के थमे रहने से विभाग को करीब 14 करोड़ रुपये की राजस्व हानि होने का अनुमान है। डिपो में तैनात 700 से ज्यादा कर्मचारियों के वेतन पर हर माह 1.20 करोड़ रुपये खर्च होते है। यही नहीं, प्रदेश के विभिन्न जनपदों और अन्य राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए 60 से ज्यादा बसें बाहर भेजी गई हैं। इसे देखते आने वाले दिनों में भी रोडवेज को घाटा बढ़ना तय है।
दिन में दो बार बसें हो रहीं सैनिटाइज
यात्रियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए अधिकारी विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। निगम के प्रबंध निदेशक के निर्देशानुसार परिचालकों को यात्रियों के हाथ साफ कराने के लिए सैनिटाइजर की शीशियां उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही पहला फेरा पूरा कर मुख्यालय लौटने वाली बसों को सैनिटाइज करने के बाद दोबारा निर्धारित मार्गों पर भेजा जा रहा है। इस काम में फॉर्मासिस्ट दीपक गुप्ता और धीरेंद्र सिंह के साथ लैब टेक्नीशियन आकाश मिश्रा, विजय कुमार, रईस अहमद आदि की टीम जुटी है।
पहले दिन चलाई गई बसों को जितना डीजल दिया गया, वह पूरा खर्च नहीं हुआ और इसीलिए बीते दिन डीजल की खपत कम हो गई। डीजल व्यय की तुलना में पर्याप्त यात्री नहीं मिल रहे, लेकिन उनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। इसलिए अगले कुछ दिनों में आमदनी भी बढ़ने की उम्मीद है।
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- एसके वर्मा, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक
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