शाहजहांपुर। आवश्यक सेवा से जुड़ी वस्तुओं और फूड इंडस्ट्री से संबंधित लघु उद्योग इकाइयों में भले ही उत्पादन शुरू हो चुका हो लेकिन लॉकडाउन के चलते लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों का आर्थिक ढांचा चरमरा गया है। इसे देखते हुए इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री और उद्योग मंत्री को ज्ञापन भेजकर विभिन्न क्षेत्रों में रियायतेें देने की मांग की है।
प्रधानमंत्री को भेजे प्रस्ताव में आईआईए ने कहा गया है कि लॉकडाउन ने छोटे उद्योगों का संचालन बाधित कर दिया है क्योंकि एमएसएमई सेक्टर नकद अर्थ व्यवस्था पर निर्भर होते हैं। श्रमिकों न मिलने, कच्चे माल एवं परिवहन के बुनियादी ढांचों पर प्रतिबंध लगने से 25 लाख रुपये और इससे कम पूंजी वाले इन उद्योगों का कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सरकार ने ब्याज दरों में कमी, एनपीए में वृद्धि और ईपीएफ भुगतान में कंपनियों का अंशदान देकर बड़े संस्थानों को थोड़ा लाभ पहुंचाया, लेकिन छोटी एवं असंगठित इकाइयों के लिए अभी बहुत कुछ करना जरूरी है।
बता देें कि जिले में लगभग चार हजार ऐसी लघु औद्योगिक इकाइयां हैं जो नमकीन, रस्क, ब्रेड, आटो वर्कशॉप, इस्पात ग्रिल निर्माण, हथकरघा आदि से जुड़ी हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी इकाइयों की है जो श्रम विभाग में पंजीकृत नहीं हैं। आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल के अनुसार श्रम कानूनों में ढील का इन इकाइयों को सीधा कोई लाभ नहीं मिलेगा, इसलिए सरकार को उनके हितों पर ध्यान देने के लिए सुझाव भेजे गए है। ज्ञापन भेजने वालों में आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अग्रवाल सहित चैप्टर चेयरमैन अभिनव ओमर और अधिशासी निदेशक डीएस वर्मा शामिल हैं।
भेजे गए सुझाव
सभी तरह के ऋण पर अधिकतम ब्याज दर 6.5 प्रतिशत हो
अगले वर्ष 31 मार्च तक कोई ब्याज नहीं लिया जाए
ऋण सीमा के नवीनीकरण की प्रोसेसिंग फीस माफ हो
सभी तरह की वसूलियां दो वर्ष के लिए स्थगित हों
जीएसटी के सभी स्लैब में पांच प्रतिशत की कटौती हो
मास्क, सैनिटाइजर, दस्ताने, इंफ्रारेड थर्मामीटर पर जीएसटी शून्य हो
दो वर्ष तक आयकर रिटर्न विलंब शुल्क समाप्त हो
माल परिवहन आपूूर्ति ढांचा सुचारु किया जाए