केंद्र पर नहीं रहते हैं प्रभारी, वाहन और भवन भी कंडम
अधिकारी भी नहीं देते ध्यान, स्टाफ भी हुआ लापरवाह
गांव नरौठा के पास स्थित राजकीय मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र का हाल बेहाल है। लाखों की आय देने वाली हैचरी की हालत अधिकारियों की लापरवाही के कारण खराब हो चली है। इससे आय घटने की भी आशंका है।
गांव मुरादपुर और नरौठा के बीच खुटार-पूरनपुर मार्ग पर कई वर्ष पूर्व हैचरी (मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र) की स्थापना की गई थी। यहां तीन दर्जन से अधिक तालाब खुदवाए गए थे। स्थापना के बाद जिम्मेदार अधिकारी हैचरी पर ही रहते थे। इससे अधीनस्थ स्टाफ पूरी जिम्मेदारी से काम करता था और हैचरी के भवन, वाहन आदि का रखरखाव भी सही रहता था। अब प्रभारी आदि के यहां नहीं रहने से स्थिति बेहद खराब हो चली है।
अन्य उत्पादन केंद्रों पर मत्स्य बीज तैयार हो गया है और उसकी बिक्री की तैयारी की जा जा रही है, जबकि मुरादपुर के राजकीय मत्स्य विकास निगम पर अभी बीज ही तैयार नहीं हो सका है। इससे मछली पालन करने वाले लोगों को दूसरे स्थानों से बीज खरीद कर लाना पड़ेगा। ऐसे में हैचरी की आय घट जाएगी। हैचरी में कार्यरत श्रमिकों का कहना है कि यहां प्रति वर्ष 30 से 40 लाख मछली के बच्चे तैयार किए जाते हैं और मछली पालन करने वालों को बेचा जाता है।
जीप, स्कूटर और अतिथिगृह जर्जर
खुटार। देखरेख के अभाव में राजकीय मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र की जीप और स्कूटर आदि कंडम हो गए हैं। दोनों वाहनों को खुले में खड़ा कर दिया गया है। यहां के अतिथिगृह की दशा भी बेहद खराब हो चली है। परिसर में लंबी घास और झाड़ियों की भरमार है। इनमें सांप आदि ने अपना ठिकाना बना लिया है। ये तालाबों में जाकर मछलियों को खा जाते हैं।
उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मैं केंद्र पर नहीं रह पाता हूं, लेकिन वहां जाकर व्यवस्थाएं देखता रहता हूं। कंडम वाहनों को नीलाम कराया जाएगा और अतिथिगृह को भी सही कराया जाएगा। सर्दी के कारण मत्स्य बीज तैयार होने में देरी हुई है।
- टीवी सिंह, प्रभारी राजकीय मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र नरौठा, खुटार।