साढ़े तीन साल पहले 11 वर्षीय चचेरी बहन को साथियों संग अगवा करने और जबरन शारीरिक संबंध बनाने के मामले में सोमवार को सुनवाई पूरी कर अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम एहसानुल्लाह खान ने आरोपी पप्पू को दोषीसिद्ध अभियुक्त करार दिया। उसे 10 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। बच्ची को अगवा करने में शामिल रहे पप्पू के भाई नन्हें और अनिल के अलावा साथी देवेंद्र को भी दोषीसिद्ध अभियुक्त करार देते हुए कोर्ट ने सात वर्ष की कैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। यह बहुचर्चित घटना तिलहर थाना इलाके में 10 नवंबर 2012 की रात हुई थी। 11 वर्षीय बेटी के रात में अचानक गुम हो जाने पर घर वाले खासे परेशान हुए। रात भर तलाशने के बाद अगले दिन सुबह परिवारीजनों को पता चला कि बच्ची का चचेरा और इसी गांव के तीन लड़के भी गायब हैं। तहरीर देने पर घटना के हफ्ते भर बाद 18 नवंबर 2012 पुलिस ने आईपीसी की धारा 363, 366 तहत मुकदमा दर्ज किया। अगले दिन 19 अक्तूबर लड़की को बरामद कर लिया गया। लड़की के बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराय तो रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी पप्पू समेत सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। मुकदमे में आईपीसी की धारा 376 जोड़ने के साथ पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। सरकारी वकील मनफूल सिंह वर्मा की ओर से प्रस्तुत गवाहों के बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य, पीड़ित के बयान एवं आरोपियों द्वारा रहम की मांगी गई भीख का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया।