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राजकीय मेडिकल कॉलेज का हाल, स्ट्रेचर पर इलाज, बेड पाने को सिफारिश करवा रहे मरीज

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राजकीय मेडिकल कालेज में चैंबर के बाहर लगी भीड़ । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। दिन में गर्मी और रात की सर्दी ने स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में बुखार, पेट के दर्द समेत कई बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा होने के बाद बेड की कमी पड़ गई। बेड पाने को मरीज सिफारिश तक करा रहे हैं। अस्पताल में मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जा रहा। वहीं दूसरी तरफ ओपीडी में डॉक्टरों के चैम्बर के बाहर सुबह से दोपहर बाद तक लंबी लाइनें लग रही हैं।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए 330 बेड पड़े हैं, लेकिन कोविड के कारण 100 बेड आइसोलेशन वार्ड में डाल दिए गए। इन दिनों मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण बुखार, पेट दर्द, ह्दय रोग, सांस के मरीजों के पहुंचने पर अस्पताल में बेड को लेकर संकट खड़ा हो गया। मरीजों की भरमार के कारण अस्पताल में बेड की कमी पड़ गई। इस वजह से मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने के साथ ही इलाज किया जा रहा।
बेड को पाने के लिए मरीज सिफारिश कराने तक को मजबूर हैं। पर्याप्त बेड न होने से अस्पताल स्टाफ भी काफी ज्यादा परेशान है। दूसरी तरफ बच्चों को डायरिया घेर रहा है। दस्त से पीड़ित बच्चे बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं। महिलाओं में पेट में संक्रमण वाले मरीज आ रहे हैं। यूटीआई (यूरीनरी ट्रक्ट इंफेक्शन) की वजह से पेशाब करने में जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट के हिस्से में दर्द होने समेत कई बीमारियों से महिलाएं परेशान हैं। वर्तमान समय में करीब 12 से 13 सौ मरीज ओपीडी में दवा ले रहे हैं।
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यह सावधानी बरतें
- मौसम में बदलाव को देखते हुए पानी की शुद्धता पर विशेष ध्यान दें।
- आरओ न होने पर पानी को उबालकर ठंडा करने के बाद सेवन करें।
- बच्चों की दूध पिलाने वाली बोतल को दिन में तीन बार खौलते हुए पानी में उबालें।
- डायरिया होने पर ओआरएस का घोल, दलिया, शिकंजी, पतली दाल का पानी बच्चे को दें।
- रोगों से बचाव के लिए हाईजीन (स्वच्छता) का विशेष ध्यान रखें। डाक्टर से परामर्श के बाद ही दवा खाएं।
वर्तमान में बुखार, खांसी, जुकाम आदि के मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया। मौसम काफी उतार-चढ़ाव वाला है। रात में सर्दी और दिन की गर्मी ने विपरीत असर डाला। ऐसे में कई तरह की बीमारियां लोगों को घेर रही हैं। ऐसे में चिकित्सक से परामर्श लेकर ही दवा लें। पानी की शुद्धता पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। - डॉ. एमएल अग्रवाल, फिजिशियन, राजकीय मेडिकल कॉलेज
-330 बेड होने के बावजूद मात्र 200 बेड ही संचालित हैं। शेष बेड आइसोलेशन रूम में पड़े हुए हैं। मरीजों की संख्या में इजाफा होने पर अतिरिक्त बेड डलवाकर उपचार कराया जा रहा है। - डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज

राजकीय मेडिकल कालेज में स्ट्रेचर पर लेटे मरीज। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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