शाहजहांपुर में गर्रा और खन्नौत नदियां उफान पर हैं, जिससे सुभाषनगर सहित कई कॉलोनियों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गर्रा का पानी बरुआ नाले से सुभाषनगर में घुस गया है। बाढ़ के खतरे से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
शाहजहांपुर में गर्रा नदी उफान पर है और खन्नौत का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। गर्रा का पानी बरुआ नाले से होता हुआ सुभाषनगर कॉलोनी में पहुंच गया है। सड़क और गलियों में पानी भरने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। जलस्तर लगातार बढ़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से बाढ़ से बचाव के इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं।
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गर्रा और खन्नौत में जलस्तर बढ़ने के बावजूद पिछले दो वर्षों की बाढ़ से सबक लेते हुए तैयार की गई कार्ययोजनाओं पर प्रभावी अमल नहीं हो सका। ककरा में गर्रा नदी के पुल को करीब एक मीटर ऊंचा किया गया था। अब पानी उस ऊंचे किए गए हिस्से तक पहुंच गया है और पुल का करीब एक मीटर हिस्सा ही बचा है। जलस्तर और बढ़ा तो पानी पुल से टकरा सकता है।
मनफूल कॉलोनी, कांशीराम कॉलोनी, आवास विकास कॉलोनी, अब्दुल्लागंज और अजीजगंज में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। लोग घरेलू सामान दूसरी मंजिल पर पहुंचाने की तैयारी में जुट गए हैं। नगर निगम के नए भवन की चहारदीवारी तक गर्रा का पानी पहुंच गया है। अजीजगंज स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में भी पानी भर गया है। इससे कुत्तों की नसबंदी का काम बंद हो गया है और स्टाफ भी वहां से निकल गया है।
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गर्रा नदी में उफान
बरुआ नाले पर फाटक नहीं लगा सुभाषनगर में फिर पहुंचा पानी
गर्रा नदी का पानी बरुआ नाले से बैक होकर सुभाषनगर में पहुंचता है। वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना और डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने नाले पर फाटक लगवाने के निर्देश दिए थे। नगर निगम और सिंचाई विभाग की ओर से कई बार एस्टीमेट बनाए गए, लेकिन अब तक फाटक नहीं लग सका। इसका खामियाजा कॉलोनी के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
वहीं, लोधीपुर में खन्नौत नदी के दूब क्षेत्र में लोगों ने मकान बना लिए हैं। पिछले दो साल से बाढ़ आने पर ये मकान जलमग्न हो जाते हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है। स्थायी समाधान नहीं होने से दूब क्षेत्र में बने मकान प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सुभाषनगर मोहल्ले में भरा पानी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दो साल में बाढ़ से हो चुका है बड़ा नुकसान
पिछले दो वर्षों में गर्रा और खन्नौत नदियों की बाढ़ से ककरा, अजीजगंज, आवास विकास कॉलोनी, लोधीपुर आदि मोहल्ले खासतौर पर प्रभावित हुए हैं। लगभग 50 हजार लोगों को परेशानी उठानी पड़ी थी। लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था। दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर भी पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ था।
राजकीय मेडिकल कॉलेज में पानी भरने पर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट करना पड़ा था। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि अभी मेडिकल कॉलेज में पानी नहीं आया है लेकिन नजर रखी जा रही है। आपात स्थिति में नीचे का फ्लोर खाली कर मशीनों और मरीजों को शिफ्ट कर दिया जाएगा।
गर्रा नदी में उफान
शरणालय चिह्नित नहीं नाव-मोटरबोट भी नहीं दिखीं
प्रशासन अभी नदियों के बढ़ते जलस्तर को बाढ़ की स्थिति नहीं मान रहा है। यही वजह है कि शरणालय स्थल चिह्नित करने और राहत सामग्री के इंतजाम की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। नदियों में बचाव कार्य के लिए नाव या मोटरबोट भी नजर नहीं आईं।
सुभाषनगर की पूनम ने बताया कि कॉलोनी में पानी पहुंचने लगा है। गत दो वर्षों में आई बाढ़ से पानी घर में भर जाता है। इससे काफी नुकसान हो रहा है। सामान को घर की छत पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
सुभाषनगर की नवल सक्सेना ने कहा कि प्रशासन की ओर से बाढ़ आने पर कोई मदद नहीं की जाती है। एक साल में फिर से गृहस्थी का कुछ सामान लिया था। फिर से खराब होने की आशंका बन रही है। बाढ़ से बचाव के पहले से इंतजाम किए जाने चाहिए।
सुभाषनगर की शिवांगी कश्यप ने कहा कि दो वर्षों से आ रही बाढ़ में करीब चार लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। फिर से गली में पानी भर गया है। बाढ़ की चिंता सताने लगी है। सामान को दूसरी मंजिल पर ले जाना बहुत मुश्किल है।
क्षेत्रीय पार्षद नवनीत विनय सक्सेना ने बताया कि बरुआ नाले का पानी आने से कॉलोनी में भर जाता है। नाले पर फाटक लगाने के लिए वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने निर्देश दिए थे, लेकिन नगर निगम और सिंचाई विभाग की ओर से टालमटोल चलती रही।
गर्रा का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ 90 सेमी नीचे
सिंचाई विभाग की जारी रिपोर्ट के अनुसार, गर्रा नदी का जलस्तर वर्तमान में 147.85 मीटरगेज है, जबकि खतरे का निशान 148.88 मीटरगेज है। शनिवार को गर्रा नदी खतरे के निशान से 90 सेमी नीचे रह गई। शनिवार को दियूनी बैराज से गर्रा नदी में 3896 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जबकि कठिना नदी से 4250 क्यूसेक और खखरा नदी से 650 मीटर पानी पास किया गया है। खन्नौत नदी का वर्तमान जलस्तर 144.40 मीटरगेज है, जबकि खतरे का निशान 145.750 मीटरगेज है।
डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आपदा से बचाव के लिए जिले में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ मुस्तैद है। शनिवार सुबह आठ से रात आठ बजे तक गर्रा नदी का जलस्तर केवल पांच सेंटीमीटर बढ़ा है। इससे उम्मीद है कि जलस्तर रविवार रात आठ बजे तक स्थिर रहेगा। इसके बाद पानी तेजी से घटेगा। जलालाबाद और कलान तहसील के 11 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। वहां पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।