शाहजहांपुर। लघु सीमांत श्रेणी में शामिल छोटे गन्ना किसानों और सैनिक परिवारों को पेराई सत्र 2019-20 में गन्ना पर्चियों के लिए सहकारी गन्ना विकास समितियों के अनावश्यक चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रदेश के गन्ना आयुक्त मनीष चौहान द्वारा नवीन पेराई सत्र के लिए घोषित गन्ना सट्टा एवं आपूर्ति नीति के तहत छोटे किसानों को प्राथमिकता के आधार पर 45 दिन में पर्चियां जारी कर दी जाएंगी। नई नीति का लाभ उन किसानों को भी मिलेगा, जो क्षेत्रीय गन्ना समिति के वैध सदस्य होने के बावजूद बीते दो पेराई सत्र मेें चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति नहीं कर सके।
जिले में लगभग 1.50 लाख गन्ना किसान हैं और उन्होंने 1.15 लाख हेक्टेयर में गन्ना फसल बोई है। गन्ना आपूर्ति नीति के अनुसार पर्ची वितरण मेें प्राथमिकता का लाभ जिले के करीब 15 हजार छोटे किसानों को मिलना तय है। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम ने बताया कि अधिकतम चार बैलगाड़ी (60 क्विंटल) गन्ना का सट्टा कराने वालों को विभाग ने छोटे किसानों की श्रेणी मेें रखा है। उन्होंने बताया कि पेराई सत्र में सेना से अवकाश लेकर घर आने वाले सैनिकों को 15 दिन पहले ही पर्चियां निर्गत कर दी जाएंगी, जिससे कि उन्हें छुट्टी की अवधि में पर्चियोें का इंतजार नहीं करना पड़े।
जिले मेें सैनिक परिवारों से जुड़े करीब पांच हजार गन्ना किसान होने का अनुमान है। गन्ना सट्टा एवं आपूर्ति नीति मेें केवल 30 सितंबर तक नई सदस्यता देने का प्रावधान किया गया है। मतलब साफ है कि पेराई सत्र शुरू होने के बाद किसी भी दशा में कोई नया सट्टा नहीं बनेगा और पूर्व निर्धारित सट्टा में संशोधन भी नहीं होगा। हालांकि, दस अक्तूबर तक कृषक वार सट्टा की मात्रा का निर्धारण होगा, लेकिन इसमें वहीं किसान शामिल होंगे, जो सट्टा सर्वे करा चुके हैं। समिति की सदस्यता लेने के बावजूद जिन किसानों ने पिछले दो सत्रों में मिल को गन्ना आपूर्ति नहीं की, उन्हें नई नीति में राहत दी गई है। ऐसे किसानों का सट्टा निरस्त होने के बजाय उनका सट्टा चीनी मिल की औसत गन्ना आपूर्ति के आधार पर लागू किया जाएगा। डीसीओ ने मंगलवार को विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर इन सभी नियमों निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करने के निर्देश दिए हैं।
गन्ना सट्टा एवं आपूर्ति नीति की अन्य खास बातें
-चार सितंबर तक सट्टा सूचियों का सार्वजनिक प्रदर्शन पूर्ण किया जाएगा।
-पांच से दस सितंबर किसानों को प्राथमिक कैलेंडर वितरण।
-15 से 30 सितंबर तक सट्टा प्रदर्शन मेले लगेंगे।
- पांच वर्ष गन्ना आपूर्ति के आधार पर तय होगा बेसिक कोटा।
-एक वर्ष गन्ना देने वालों का कोटा गत वर्ष की आपूर्ति से तय होगा।
- चीनी मिल चलने के एक सप्ताह पूर्व किसानों को कैलेंडर मिलेगा।
-ब्लॉक स्तर पर समितियों के शिकायत प्रकोष्ठ किसानों की सुनवाई करेंगे।