शाहजहांपुर/परौर। बैराजों से रिलीज किए गए अतिरिक्त पानी के चलते बुधवार रामगंगा का जल स्तर 70 सेमी बढ़ गया। इसके चलते परौर और अल्हागंज क्षेत्र के तटवर्ती गांवों की ओर बाढ़ का पानी बढ़ने से ग्रामीण जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। कलान के एसडीएम सुरेंद्र कुमार सिंह ने तहसीलदार और लेखपालों के साथ रामगंगा के तटवर्ती गांवों का दौरा कर बाढ़ चौकियों के कर्मचारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। परौर क्षेत्र के हैदलपुर और मंझा गांव के करीब भूमि कटान भी जारी रहा।
परौर क्षेत्र के गांव मोहनपुर, मंझा, बिचपुरी, नरायन नगर पश्चिमी, हैदलपुर आदि रामगंगा के किनारे बसे हुए हैं। इसलिए नदी मेें पानी बढ़ने के साथ इन गांवों के बाशिंदों के सामने समस्या पैदा हो जाती है। तटवर्ती गांवों के तमाम भूमिहीन लोगों का मूल पेशा पशुपालन है। यह परिवार गाय-भैसों का दूध बेंचकर अपना भरण पोषण करते हैं। खेत, खलिहानों और चारागाहों की जमीनें डूब क्षेत्र में आने लगी है। इससे चारे का संकट गहरा गया है। ग्रामीण भूसा का प्रबंध कर पशुओं का पेट भर रहे हैं। कई स्थानों पर भूसा भी भीग कर सड़ गया है। रामगंगा में पानी बढ़ने से तटवर्ती गांवों मेें रहने वालों की धड़कनें तेज हो गई हैं। पानी काफी तेजी से बढ़ रहा है। इसे देखते कटान में जमीनें गवां चुके ग्रामीणों का मानना है कि यदि इसी तरह पानी बढ़ता रहा तो गत वर्ष की तरह विषम हालात पैदा हो सकते हैं। पिछले साल अचानक पानी बढ़ने के बाद रामगंगा कटान करके मोहनपुर के पास आ गई है और कटान रोकने के लिए लगाए गए जिओ ट्यूब भी बह गए हैं।
मेरा दस बीघा कीमती खेत पांच साल पहले कट गया था। अब रामगंगा का पानी खेत की जमीन पर चल रहा है।
-धनपाल सिंह, बिचपुरी
मेरी पांच बीघा खेत की जमीन रामगंगा के बीच में आ गई है। खेत कट जाने से परिवार के भरण-पोषण की समस्या हो गई है।
-राम सिंह कुशवाहा, बिचपुरी
पहले परिवार सहित नरायन नगर पूर्वी में रहता था, लेकिन पूरा गांव कटान की भेंट चढ़ने पर बाजार मोहल्ले में रहना पड़ रहा है।
-दोदराम कुशवाहा, परौर